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काशी सत्संग: “राम नाम की लूट”

कबीर दास जी कहते हैं,
“लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट।
पाछे फिर पछताएगा, प्राण जाहि जब छूट।।”
अर्थात्, अभी राम नाम की लूट मची है, अभी तुम भगवान् का जितना नाम लेना चाहो ले लो, नहीं तो समय निकल जाने (मर जाने पर) के बाद पछताओगे कि मैंने प्रभु श्रीराम को याद नहीं किया।

“राम” नाम की महिमा कलयुग में भी है, इसी से जुड़ा एक प्रसंग- एक आदमी बर्फ बनाने वली कम्पनी में काम करता था। एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया। छुट्टी का वक्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे। किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है। वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा। अब जब मौत सामने नजर आने लगी, तो भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा। अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा।

उसने भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया, अहिल्या को पत्थर से नारी बनाया, शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया। प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है, तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो। मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ। मैं जीवनभर आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू  निकलने लगे।

एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ्रीजर रूम  में खट खट की आवाज हुई। दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया। उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और  गर्म हीटर के पास ले गया। उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई, तो उसने चौकीदार से पूछा, आप अंदर कैसे आए?

चौकीदार बोला, “साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर (officers) कारखाने में आते जाते हैं। मैं देखता हूं, लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हैं, तो मुझसे हंसकर ‛राम राम’ करते हैं।” चौकीदार आगे बोला कि छुट्टी के समय निकलते हुए आपका ‛राम राम काका’ कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है। अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं। आज भी रोज की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना, लेकिन लौटते हुए ‛राम राम काका’ सुनने का इंतज़ार करता रहा। जब ज्यादा देर हो गई तो, मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो।

वह आदमी हैरान रह गया। ‛राम राम’ कहने की वजह से आज उसकी जान बच गई थी।
ऊं तत्सत...

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