'शब्दों की दुनियां से हर कोई नहीं खोज लाता है मोती, ये काम कोई डूबता हुआ ही करता है।'
'शायरी करते हैं के वो सामने जैसे बैठा हो,
चेहरा बनता है जिसका वो इश्क़ तुम्हारा है।
लौट जाओ तुम भी भले छोड़ कर,
मैं बैठा ही रहूँगा यादों के घरौंदे में।
उठ कर मर्ज़ी जाओ तो जाकर देखो,
लौट कर आना है, जब भी बुलाऊंगा।'


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