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बेबाक हस्तक्षेप

क्या आप मानते हैं कि अच्छी सड़कें बनना, रेल सुविधओं का विस्तार, बिजली की व्यवस्था विकास के पैमाने हैं ? अगर आप ऐसा मानते हैं तो आप देश की आजादी के नायकों को लानत भेज रहे हैं। देश की आजादी के नायकों ने विषम परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोया और अपनी आजादी के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने खुशहाल भारत का सपना देखा था। तो सवाल एक बार फिर से पर अलग अर्थों में क्या देश की आम जनता की खुशहाली विकास का पैमाना हैं? उत्तर आप स्वयं निर्धारित कर सकते हैं।

अगर अच्छी सड़कें, बिजली और रेल ही विकास का पैमान होती तो ये सभी में अंग्रेज कही बढ़कर थे जिन्होंने अपने स्वार्थवश देश को लूटने के लिए इन सभी सुविधाओं का विकास किया था। तो क्या ये मान लिया जाए कि आज जिस तरह निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा हैं और प्राईवेट कंपनियों को सरकार में भागीदारी दी जा रही हैं तो मोदी सरकार अंग्रेज सरकार की नीतियों पर कार्य कर रही हैं। सच्चाई आप खुद से पूछ कर देखे उत्तर आवश्य मिलेगा। 

आज देश में युवा बेरोजगार हैं, किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, शिक्षा का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा हैं और अच्छी शिक्षा पैसों के अभाव में मध्यम वर्ग से दूर होती जा रही हैं, देश की आधी आबादी महिलाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई हैं, महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में कमी नहीं आ रही हैं, देश में अपराध का ग्राफ बढ़ा हैं और तो और भ्रस्टाचार अपने चरम पर हैं तो क्या देश विकास कर रहा हैं? जानकारों की माने तो मोदी एक कुशल राजनेता की भांति लोगों का ध्यान भटकाने में माहिर हैं। किसी भी सवाल का सीधा जबाब नहीं देना उनकी आदत हैं। अगर आप नौकरी मांगेंगे तो आप को जुमला मिलना तय हैं। ऐसे में विकास कितना हो रहा हैं आप स्वयं निर्धारित कर सकते हैं। 

अगर यही विकास का पैमाना सही माने तो आज जिस डिजिटल युग की बात हो रही हैं उसका सूत्रपात पूर्व  प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने किया था, लोगों में लैपटॉप बाटने का कार्य अखिलेश यादव ने किया, आरटीआई देन कांग्रेस सरकार की हैं तो मोदी ने ऐसा नया क्या कर दिया जो देश को समुचित विकास की ओर ले जा सकता हैं। 

जानकारों के माने तो मोदी सरकार के आने के बाद से देश में भेदभाव की खाई चौड़ी हुई हैं, जात पात के नाम पर खून खराबे हो रहे हैं यहाँ तक की अमिर और गरीब के बीच की खाई और गहरी हो गई हैं तो विकास कहाँ ठहर गया जो इन सब विरोधाभासों से लड़ता। अगर सच कहाँ जाए तो मोदी केवल सत्ता में आसीन होना जानते हैं और वोट बटोरना, विकास किस तरह होगा इसपर उनका कोई विजन ही नहीं हैं। 

पिछले चार सालों में देश की स्वतंत्र मीडिया पर मोदी ने जमकर हमला बोला और उसे खोखला कर दिया। अब जब सरकार के गलत निर्णयों पर कोई आवाज उठाने वाला ही नहीं होगा तो सरकार सही दिशा में चल रही हैं या नहीं ये उसे कौन बताएगा। ऐसे में आप भी तत्कालीन हो रहे विकास का मजा लीजिए। 

■ संपादकीय 

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