“स्कूल चले हम” पर क्या करने!! - Kashi Patrika

“स्कूल चले हम” पर क्या करने!!

सर्व शिक्षा अभियान के तहत जारी स्लोगन “स्कूल चले हम”, स्कूल तक तो ले जाता है, लेकिन वहां जाकर बच्चे करें क्या इसकी व्याख्या नहीं करता! यह चर्चा इसलिए कि आए दिन होने वाले बदलावों और स्कूलों में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों की वजह से अब स्कूल के शिक्षक भी परेशान होने लगे हैं। शिक्षा का मंदिर माने जाने वाले स्कूलों की दुर्दशा देख कोई भी व्यक्ति व्यथित हो सकता हैं। सरकार ने सिरे से सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को नकार दिया है और इसे भगवान् भरोसे छोड़ दिया हैं।आज स्थिति बद से बदतर होती जा रही हैं और सरकार इस ओर ध्यान देने के मूड में नहीं हैं।


कभी पुस्तकों की छपाई का रोना, कभी फंड की लेट लतीफी, तो कभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का किसी गैर सरकारी काम में लगाया जाना, शिक्षकों की कमी। ये आम बात हो गई हैं। सरकार इस ओर कम ध्यान दे रही हैं कि गुणवत्तापरक शिक्षा किस तरह से मुहैया करवाया जा सके बल्कि पाठ्क्रम में विद्यार्थी किस गुट के महानुभावों को पढ़ेंगे इसपर उसका ज्यादा ध्यान हैं। ये तब है जब आज लगभग पूरे विश्व ने माना हैं कि लोगों के समुचित विकास के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का सबसे ज्यादा महत्व हैं। 

अयोग्य शिक्षकों के भर्ती का सिलसिला बदस्तूर जारी है। माना जाता हैं कि सरकारी विद्यालयों में लगभग 80 % नियुक्तियां नेताओं के इशारे पर होती हैं। इस भाई-भतीजावाद का स्तर इतना ज्यादा हैं कि नव न्युक्त होने वाले शिक्षक नौकरी पाने से पहले ही राजनेताओं के चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं। इन नियुक्तियों में जमकर पैसे का हस्तांतरण होता हैं और खुलकर डंके की चोट पर अयोग्य शिक्षकों की न्युक्ति की जाती हैं। 

सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति समस्या को और गंभीर रूप प्रदान करती हैं। पर्दे की पीछे चल रहे इस खेल में विद्यार्थी या तो स्वयं से पढाई करता हैं या उसके अभिभावक किसी योग्य शिक्षक के माध्यम से उसकी पढाई घर पर पूरी करवाता हैं। इससे स्कूलों के रहते कोचिंग सेंटरों का मकड़जाल लगभग पुरे भारत में फ़ैल गया हैं जिन्होंने लगभग स्कूलों का रूप ले लिया हैं। आप को जान कर हैरानी होगी कि इन बड़े बड़े कोचिंग सेंटर के मालिक कोई न कोई राजनेता या उसका सम्बन्धी होता हैं।  

अब जब हमारी चुनी सरकार ही इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही, तो ऐसे में गुहार किससे लगाई जाए, बेहतर हैं अन्य गंभीर मामलों की तरह इसे भी भगवान् भरोसे छोड़ दिया जाए तो बेहतर होगा। 
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