किसी देश की प्रगति का वाहक वहां की आम जनता होती हैं न कि नेता और उच्च पदों पर आसीन अधिकारी गण। वर्तमान केंद्र सरकार का रवैया वैसा ही हैं कि हम तो सत्ता का सुख भोग रहे हैं जनता को उसको देख कर खुश होना सीख लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी के पिछले ही साल के विदेश भ्रमण का लेखा-जोखा सामने आया हैं। तक़रीबन हर ११ रहवे दिन मोदी ने विदेश में समय बिताया हैं। वो भी तब जब देश में भारी संख्या में बेरोजगारी और लोगों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हो। बढ़ते वस्तुओं के मूल्यों और लोगों की कम होती आय चिंता का विषय बना हुआ हैं। आम जन की बुरे समय के लिए की जाने वाली बचत भी मटियामेट हो चुकी हैं; रोजमर्रा की जरूरतों को जुटाने में ही व्यक्ति की सभी आय समाप्त हो जा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की सूट-बूट वाली सरकार से लोगों को यही उम्मीद थी, वो देश को बीच मझधार में छोड़ कर विदेश भ्रमण करेंगे।
ऐसा नहीं हैं कि यह भाजपा की पहली सरकार हैं जिसने अपने वादे पूरे न किये हो। देश की राजनीति में जब भी भाजपा केंद्र या राज्य की सत्ता में काबिज होती हैं तो लोगों को ऐसा लगता हैं कि वो सबसे पहले अपने घोषणा पत्र को फाड़ कर फेक देती हैं।
आज मोदी अपने सुख और वैभव को आम जन का सुख वैभव बताने से गुरेज नहीं कर रहें हैं। मोदी बार-बार ये जतलाने से बाज नहीं आते की राष्ट्र का सर्वे सर्वा विश्व का सर्वमान्य नेता बन चूका हैं। तो इतनी बड़ी आबादी का नेता आज आम जन को ही भूल बैठा हैं जिसने उसे इस गद्दी पर बैठाया हैं। किसी भी जनता के मुद्दे पर मोदी के कानो में जूं तक नहीं रेंगती।
सामान्य मध्यम वर्ग जिसने मोदी को बड़ी संख्या में वोट देकर सत्ता पर काबिज करवाया उसे मोदी ने अपने चार साल के कार्यकाल में गरीबी के कगार पर ला कर खड़ा कर दिया। इस वर्ग के विकास के लिए न तो सरकार ने कोई पुख्ता नीति ही बनाई और न है विशेष ध्यान दिया। आज मध्यम वर्ग अपने को ठगा सा महसूस कर रहा हैं। अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मध्यम वर्ग को मोदी ने पिछले चार सालों में आमिर वर्ग के हाथों का खिलौना बना दिया। ये मोदी सरकार की नीति ही थी जिसने मध्यम वर्ग की बचत को आमिर वर्ग के विकास के लिए बैंकों के माध्यम से पूँजी बनाने का काम किया।
अगर मोदी सरकार २०१९ के लोकसभा चुनावों में बुरे परिणाम लाती हैं तो ये मध्यम वर्ग का ही काम होगा जिससे मोदी ने सबसे ज्यादा वादे किए थे जिसे बाद में जुमला बना दिया गया।
:संपादकीय
प्रधानमंत्री मोदी के पिछले ही साल के विदेश भ्रमण का लेखा-जोखा सामने आया हैं। तक़रीबन हर ११ रहवे दिन मोदी ने विदेश में समय बिताया हैं। वो भी तब जब देश में भारी संख्या में बेरोजगारी और लोगों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हो। बढ़ते वस्तुओं के मूल्यों और लोगों की कम होती आय चिंता का विषय बना हुआ हैं। आम जन की बुरे समय के लिए की जाने वाली बचत भी मटियामेट हो चुकी हैं; रोजमर्रा की जरूरतों को जुटाने में ही व्यक्ति की सभी आय समाप्त हो जा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की सूट-बूट वाली सरकार से लोगों को यही उम्मीद थी, वो देश को बीच मझधार में छोड़ कर विदेश भ्रमण करेंगे।
ऐसा नहीं हैं कि यह भाजपा की पहली सरकार हैं जिसने अपने वादे पूरे न किये हो। देश की राजनीति में जब भी भाजपा केंद्र या राज्य की सत्ता में काबिज होती हैं तो लोगों को ऐसा लगता हैं कि वो सबसे पहले अपने घोषणा पत्र को फाड़ कर फेक देती हैं।
आज मोदी अपने सुख और वैभव को आम जन का सुख वैभव बताने से गुरेज नहीं कर रहें हैं। मोदी बार-बार ये जतलाने से बाज नहीं आते की राष्ट्र का सर्वे सर्वा विश्व का सर्वमान्य नेता बन चूका हैं। तो इतनी बड़ी आबादी का नेता आज आम जन को ही भूल बैठा हैं जिसने उसे इस गद्दी पर बैठाया हैं। किसी भी जनता के मुद्दे पर मोदी के कानो में जूं तक नहीं रेंगती।
सामान्य मध्यम वर्ग जिसने मोदी को बड़ी संख्या में वोट देकर सत्ता पर काबिज करवाया उसे मोदी ने अपने चार साल के कार्यकाल में गरीबी के कगार पर ला कर खड़ा कर दिया। इस वर्ग के विकास के लिए न तो सरकार ने कोई पुख्ता नीति ही बनाई और न है विशेष ध्यान दिया। आज मध्यम वर्ग अपने को ठगा सा महसूस कर रहा हैं। अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मध्यम वर्ग को मोदी ने पिछले चार सालों में आमिर वर्ग के हाथों का खिलौना बना दिया। ये मोदी सरकार की नीति ही थी जिसने मध्यम वर्ग की बचत को आमिर वर्ग के विकास के लिए बैंकों के माध्यम से पूँजी बनाने का काम किया।
अगर मोदी सरकार २०१९ के लोकसभा चुनावों में बुरे परिणाम लाती हैं तो ये मध्यम वर्ग का ही काम होगा जिससे मोदी ने सबसे ज्यादा वादे किए थे जिसे बाद में जुमला बना दिया गया।
:संपादकीय
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