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बेबाक हस्तक्षेप

भारत धर्म और आध्यात्म का देश हैं। बच्चे के जन्म से मृत्यु तक धर्म ही हैं जो उसे जीवन में राह दिखता आया हैं। इस धर्म की सदियों पुरानी कुछ रीतियों में से एक हैं तीर्थाटन। हर व्यक्ति जीवन में एक न एक बार उन्ही रास्तों से गुजरना चाहता हैं जिससे उनके पुरखे गुजरें थे। बुधवार को भारी सुरक्षा बालों की मौजूदगी में अमरनाथ यात्रा की शुरुआत भी उसी धर्म का एक हिस्सा हैं जो सदियों से वैसा ही अविचल सा बना हुआ हैं और सदैव चलायमान भी हैं।

इस बार इस धार्मिक यात्रा पर आतंकवादी हमले की आशंका सबसे ज्यादा बनी हुई हैं सरकार ने सुरक्षा के इंतजामात चाक चौबंध किए हैं। एक ओर जहाँ 25000 सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए हैं तो वही 15000 जम्मू कश्मीर पुलिस के सुरक्षाबलों का घेरा इस यात्रा की सुरक्षा में लगाया गया हैं। आधुनिक इंतजामात भी है जिसमे सीसीटीवी और यूएवी मशीनों का इस्तेमाल किया गया हैं। इस बार लगभग 2 लाख तीर्थयात्री इस यात्रा में भाग ले रहे हैं। इसका पहला जत्था बुधवार को जम्मू से रवाना किया गया। इसमें 1904 तीर्थयात्री हैं जिनमे 330 महिलाएं और 30 बच्चे भी शामिल हैं।

पिछली बार की यात्रा में 10 जुलाई को हुए आतंकवादी हमले में 8 तीर्थयात्रियों की जान गई थी। इसके मद्दे नजर सरकार के इंतेजामात तो पुख्ता हैं पर यात्रा का सफल आयोजन होगा या नहीं इसे बताने के लिए अभी समय का इंतजार करना होगा।

लगभग साढ़े तीन साल शासन करने के बाद हालिया बीजेपी ने जम्मू कश्मीर में सरकार से हटने का फैसला लिया था और अभी जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हैं। ऐसे में परोक्ष रूप से केंद्र का यहाँ की सरकार में सीधा हस्तक्षेप हैं। जिस तरह घाटी में हुए सभी आतकवादी हमलों और बिगड़ी सामाजिक व्यवस्था का ठीकरा बीजेपी ने पीडीपी पर फोड़ते हुए जम्मू कश्मीर से पल्ला झाड़ लिया उससे तो ऐसा ही लगता था कि बीजेपी अमरनाथ यात्रा को लेकर भी ज्यादा संजीदा नहीं थी। आज घाटी की स्थिति सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। इसमें अमरनाथ यात्रा को जारी रखना सरकार के मजबूत इरादों को दर्शाता हैं। पर अगर सुरक्षाबलों की मौजूदगी में भी किसी यात्री को नुक्सान हो तो इस नाकामी का ठीकरा बीजेपी किसपर फोड़ेगी ये समय ही बताएगा।

:संपादकीय 

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