ज्ञान गंगा।।मंगल को जन्मे, मंगल ही करते मंगलमय भगवान...जय हनुमान। बजरंग बली का नाम हनुमान क्यों पड़ा, जिसके पीछे एक कथा है। मंगल के दिन इसी की चर्चा करते हैं...
बल, बुद्धि, विद्या के दाता और क्लेश-विकार का हरण करने वाला बजरंग बली संकटमोचन कहलाते हैं। बजरंग बली को मारुति, अंजनि सुत, पवनपुत्र, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, शंकर सुवन आदि तमाम नामों से पुकारा जाता है, लेकिन खासतौर पर संसार में उन्हें “हनुमान” नाम से जाना जाता है। बजरंग बली का नाम हनुमान कैसे पड़ा, इसके पीछे एक कथा है।
एक दिन माता अंजनि बजरंग बली को आश्रम में अकेला छोड़कर फल लाने गईं थीं। तभी शिशु बजरंग बली को भूख लगी, तो वे इधर उधर चीजें ढूंढने लगे। उसी समय उन्हें आकाश में सूर्य देव दिखाई दिए तो उन्होंने सोचा ये तो बहुत बड़ा फल है, इसे ही खाया जाए। ये सोचकर वे सूर्य को खाने के लिए आगे बढ़े। उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिये आया हुआ था। लेकिन बजरंग बली को देखकर वो घबरा गया।
राहु घबराया हुआ इन्द्र के पास पहुंचा और शिकायत करने लगा, "देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे। आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है।"
राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े। राहु को देखकर बजरंग बली सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे। राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा, तो उन्होंने बजरंग बली पर वज्रायुध से प्रहार कर दिया। प्रहार से वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई। ठुड्डी को संस्कृत में हनु कहते हैं, इसलिए तब से बजरंग बली का नाम “हनुमान” पड़ गया।
बल, बुद्धि, विद्या के दाता और क्लेश-विकार का हरण करने वाला बजरंग बली संकटमोचन कहलाते हैं। बजरंग बली को मारुति, अंजनि सुत, पवनपुत्र, केसरीनन्दन, महावीर, कपीश, शंकर सुवन आदि तमाम नामों से पुकारा जाता है, लेकिन खासतौर पर संसार में उन्हें “हनुमान” नाम से जाना जाता है। बजरंग बली का नाम हनुमान कैसे पड़ा, इसके पीछे एक कथा है।
एक दिन माता अंजनि बजरंग बली को आश्रम में अकेला छोड़कर फल लाने गईं थीं। तभी शिशु बजरंग बली को भूख लगी, तो वे इधर उधर चीजें ढूंढने लगे। उसी समय उन्हें आकाश में सूर्य देव दिखाई दिए तो उन्होंने सोचा ये तो बहुत बड़ा फल है, इसे ही खाया जाए। ये सोचकर वे सूर्य को खाने के लिए आगे बढ़े। उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिये आया हुआ था। लेकिन बजरंग बली को देखकर वो घबरा गया।
राहु घबराया हुआ इन्द्र के पास पहुंचा और शिकायत करने लगा, "देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे। आज अमावस्या के दिन जब मैं सूर्य को ग्रस्त करने गया तब देखा कि दूसरा राहु सूर्य को पकड़ने जा रहा है।"
राहु की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और उसे साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े। राहु को देखकर बजरंग बली सूर्य को छोड़ राहु पर झपटे। राहु ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा, तो उन्होंने बजरंग बली पर वज्रायुध से प्रहार कर दिया। प्रहार से वे एक पर्वत पर गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई। ठुड्डी को संस्कृत में हनु कहते हैं, इसलिए तब से बजरंग बली का नाम “हनुमान” पड़ गया।
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