मुंबई की विक्टोरिया और आर्ट डेको इंसेम्बल विश्वधरोहर सूची में शामिल - Kashi Patrika

मुंबई की विक्टोरिया और आर्ट डेको इंसेम्बल विश्वधरोहर सूची में शामिल

दक्षिण मुंबई की विशेष शैली में बनीं 19वीं शताब्दी की "विक्टोरियन गॉथिक" एवं 20वीं शताब्दी की "आर्ट डेको" इमारतों को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित कर दिया है। विश्व धरोहर के रूप में मुंबई को मिला अब तक का यह तीसरा सम्मान है।


सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने शनिवार को यूनेस्को में भेजी भारत की आधिकारिक प्रविष्टि को स्वीकार किए जाने पर खुशी जताते हुए कहा कि लंदन और कुछ यूरोपीय शहरों की ही तरह मुंबई को भी वित्तीय राजधानी होने के साथ ही विश्व विरासत स्थल होने की अनूठी पहचान मिलेगी।

यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 42वें सत्र में इन ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षण देने का फैसला शनिवार को बहरीन में लिया गया। दक्षिण मुंबई में चर्चगेट स्टेशन और मंत्रालय के बीच स्थित अंडाकार क्रिकेट ग्राउंड "ओवल मैदान" के नाम से मशहूर है।

इस मैदान के किनारे-किनारे चर्चगेट स्टेशन से मंत्रालय की ओर टहलना शुरू कीजिए, तो मैदान के उस पार बाईं ओर विक्टोरियन गॉथिक शैली की पुरानी बेहद खूबसूरत इमारतें हैं। इसमें, मुंबई उच्च न्यायालय और मुंबई विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इन इमारतों को सर गिल्बर्ट स्कॉट, जेम्स ट्रिबशॉ और ले.कर्नल जेम्स फुलर जैसी हस्तियों ने डिजाइन किया था। इन इमारतों का निर्माण ज्यादातर 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ था।

इसके साथ ही ओवल मैदान के दाहिनी ओर करीब एक ही शैली में कतार से बनी इमारतें आर्ट डेको या मुंबई डेको शैली में बनी करीब 125 से अधिक इमारतें हैं। इनका निर्माण प्रथम विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद 1920 से 1935 के बीच हुआ। उस समय मुंबई के नवधनाढ्यों द्वारा बनवाई गई इन इमारतों की श्रृंखला ओवल मैदान के किनारे तक ही सीमित नहीं रही।

समुद्री जमीन पाटकर एक ही शैली की ये आर्ट डेको इमारतें मरीन ड्राइव पर भी बनाई गईं। जो आज भी नरीमन प्वाइंट से गिरगांव चौपाटी तक खड़ी दिखाई देती हैं। इस शैली की इमारतों को डब्लूआर डेविज ने डिजाइन किया था।

इन्हीं इमारतों में से किसी में कभी प्रसिद्ध पत्रकार रूसी करंजिया और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई रहते थे। आर्ट डेका इमारतों में रीगल सिनेमा, रजब महल, इंडिया इंश्योरेंस बिल्डिंग, न्यू एम्पायर सिनेमा और मरीन ड्राइव की कई रिहाइशी इमारतें शामिल हैं। कुछ आर्ट डेका इमारतें मुंबई के उत्तरी सिरे में भी हैं।

इसी प्रकार विक्टोरियन गॉथिक इमारतों की श्रृंखला भी मुंबई हाईकोर्ट और मुंबई विश्वविद्यालय की पुरानी इमारतों से आगे बढ़कर महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय, क्रॉफर्ड मार्केट, सेंट जेवियर्स कॉलेज और एशियाटिक लाइब्रेरी जैसी कई इमारतों तक जाती है। 19वीं शताब्दी की यह इमारतें ओल्ड बांबे फोर्ट की दीवारों से घिरी हुई थीं। बाद में किलेबंदी वाली यह दीवारें गिरा दी गईं। लेकिन इससे इलाके के नाम के रूप में फोर्ट शब्द जुड़ा रह गया।

गॉथिक शैली की ये है खासियत

गॉथिक शैली के वास्तु में 11वीं सदी में विकसित यूरोपियन शैली की पत्थर की बनी इमारतों में लेसेंट खिड़कियां और दागे हुए कांच का भरपूर इस्तेमाल किया गया है।

पर्यटकों को लुभानेवाली इस शैली को यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल करने का प्रस्ताव तो तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने 2012 में ही भेज दिया था। लेकिन तब यह गौरव पुरानी दिल्ली को मिला था। देर से ही सही, इस बार बाजी मुंबई के हाथ लगी है।
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