“का बरसा जब कृषि सुखाने...” कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों गर्मी में कुलबुलाते बनारसियों का है। एक तरफ चुनावी पारा उफान पर है और फिर से पूर्वांचल से बीजेपी का चुनावी बिगुल बज रहा है, तो दूसरी तरफ मौसम की आद्रता से लोग बेचैन हैं। बादलों की आवाजाही के बीच अब वाराणसी में लोगों की मानसून के प्रति बेचैनी बढ़ती जा रही हैं। 45 डिग्री के तापमान पर झुलसते पूर्वांचल में अब तक मेघ देवता मेहरबान नहीं हुए हैं। ऐसा ही रहा तो कुछ हिस्सों में खेती प्रभावित होगी तो कही लोगों का ये मौसम बारिश बिन बेजार ही जाएगा। समय से पहले भारत में प्रवेश कर चुके मानसून ने अब लगभग पूरे भारत में दस्तक दे दी हैं। इस बार बारिश का अनुमान भी औसत है।
कुछ समय बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाब के क्षेत्र के कारण मध्यप्रदेश में मानसून की रफ़्तार कम हो गई थी। इसे उत्तरी भारत में प्रवेश करने में 10 दिनों की देरी हो गई। अब जब मानसून की रफ़्तार सामान्य है, तो ऐसे में वाराणसी और आस पास के क्षेत्रों में खुलकर बारिश न होना लोगों की बेचैनी का कारण बना हुआ हैं। सूर्य देवता पहले से और भी ज्यादा प्रचण्ड दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में बादलों की आँखमिचोली लोगों की बेचैनी को और बढ़ा रहा हैं। सभी पुराने टोटके अपनाए जा चुके हैं। इसमें दिलचस्प तो मेढ़क और मेढ़की की शादी थी। जो इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए धूम धाम से कराई गई थी। खैर लगता है अब मॉडर्न युग में इंद्र देव को भी प्रसन्न करने के पुराने तरीके रास नहीं आते और उन्हें भी फेसबुक और वाट्सप के जरिये ही सन्देश पहुंचना पसंद हैं, जिससे उनकी कार्य की प्रगति बनी रहती होगी और अच्छी बारिश करवाने पर ढेर से लाईक भी मिलते होंगे।
इधर मानसून विभाग का कहना हैं कि अभी मानसून की दिशा दक्षिण की ओर बनी हुए हैं, जिस ओर कम वर्षा वाले क्षेत्र हैं। इसलिए यहाँ वर्षा नहीं हो रही हैं। जब इस की दिशा सामान्य होगी, तभी मानसून के बादल यहाँ बरसेंगे। पिछले कुछ दिनों से आद्रता 65 से 70 प्रतिशत के आस पास बनी हुई हैं और पूर्वांचल के कुछ जगहों पर बरसात भी हुई हैं। अब जब पूरा भारत ही मौसम और चुनावों के चर्चाओं से सराबोर हो रहा हैं वैसे में वाराणसी में बरसात कब होगी जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिले।
◾संपादकीय
कुछ समय बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाब के क्षेत्र के कारण मध्यप्रदेश में मानसून की रफ़्तार कम हो गई थी। इसे उत्तरी भारत में प्रवेश करने में 10 दिनों की देरी हो गई। अब जब मानसून की रफ़्तार सामान्य है, तो ऐसे में वाराणसी और आस पास के क्षेत्रों में खुलकर बारिश न होना लोगों की बेचैनी का कारण बना हुआ हैं। सूर्य देवता पहले से और भी ज्यादा प्रचण्ड दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में बादलों की आँखमिचोली लोगों की बेचैनी को और बढ़ा रहा हैं। सभी पुराने टोटके अपनाए जा चुके हैं। इसमें दिलचस्प तो मेढ़क और मेढ़की की शादी थी। जो इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए धूम धाम से कराई गई थी। खैर लगता है अब मॉडर्न युग में इंद्र देव को भी प्रसन्न करने के पुराने तरीके रास नहीं आते और उन्हें भी फेसबुक और वाट्सप के जरिये ही सन्देश पहुंचना पसंद हैं, जिससे उनकी कार्य की प्रगति बनी रहती होगी और अच्छी बारिश करवाने पर ढेर से लाईक भी मिलते होंगे।
इधर मानसून विभाग का कहना हैं कि अभी मानसून की दिशा दक्षिण की ओर बनी हुए हैं, जिस ओर कम वर्षा वाले क्षेत्र हैं। इसलिए यहाँ वर्षा नहीं हो रही हैं। जब इस की दिशा सामान्य होगी, तभी मानसून के बादल यहाँ बरसेंगे। पिछले कुछ दिनों से आद्रता 65 से 70 प्रतिशत के आस पास बनी हुई हैं और पूर्वांचल के कुछ जगहों पर बरसात भी हुई हैं। अब जब पूरा भारत ही मौसम और चुनावों के चर्चाओं से सराबोर हो रहा हैं वैसे में वाराणसी में बरसात कब होगी जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिले।
◾संपादकीय
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