...जो हंस गया, वो फंस गया - Kashi Patrika

...जो हंस गया, वो फंस गया

अशोक चक्रधर “बोलगप्पे”

हंसना-रोना

जो रोया
सो आंसुओं के
दलदल में
धंस गया,
और कहते हैं,
जो हंस गया
वो फंस गया

अगर फंस गया,
तो मुहावरा
आगे बढ़ता है
कि जो हंस गया,
उसका घर बस गया।

मुहावरा फिर आगे बढ़ता है
जिसका घर बस गया,
वो फंस गया !
....और जो फंस गया,
वो फिर से
आंसुओं के दलदल में
धंस गया !!
■■

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