बेबाक हस्तक्षेप - Kashi Patrika

बेबाक हस्तक्षेप

उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक उपचुनाव में मतदान के दौरान कई ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में तकनीकी खराबी के चलते मतदान का बाधित होना चिंतनीय विषय है। हालांकि, छोटी-मोटी तकनीकी खराबी को अनदेखा किया जा सकता है, लेकिन कैराना से राष्ट्रीय लोकदल पार्टी की उम्मीदवार तब्बसुम हसन ने खराब ईवीएम की जो सूची चुनाव आयोग को भेजी है, उसमें विभिन्न बूथ पर खराब मशीनों की संख्या 150 के आस-पास है। कमोबेश यही हाल उत्तर प्रदेश के नूरपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी रहा, जहां से कुछ मशीनों के खराब होने की खबर आई। ऐसा सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं है, महाराष्ट्र से भी उपचुनाव के दौरान ईवीएम खराब होने की खबरें आई हैं, जिसके चलते वहां 35 मतदान बूथ पर चुनाव स्थगित भी कर दिया गया है।

फिर भी, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। ऐसे में लोकतंत्र के महापर्व यानी वोटिंग में किसी भी वजह से बाधा आना लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा नहीँ है। सवाल यह भी उठता है कि अगर इवीएम की तकनीकी खराबियों के कारण उपचुनाव में मतदान बाधित हो सकता है, तो विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में ऐसा नहीं होने की क्या गारंटी है? हालांकि खराब मशीनों के बारे में चुनाव आयोग ने अपनी सफाई दे रहा है कि भीषण गरमी के कारण कुछ मशीनें खराब पड़ गईं। यह वजह है, तो विकल्पों पर विचार करने की जरूरत है जैसे अत्यधिक गर्मी में चुनाव न कराए जाएं या एसी की व्यवस्था मतदान कक्ष में कराया जाए!

वैसे भी, शिकायत का यह पहला मौका नहीं है। पहले हुए चुनावों में इवीएम के कभी देरी से पहुंचने की तो कभी उनमें खराबी की बात सामने आती रही हैं। इतना ही नहीं मतों की गिनती के बाद भी हारने वाले प्रत्याशियों के निशाने पर आजकल इवीएम ही रहता है। अनेक पार्टियों और मतदाताओं के बीच संदेह भी बना चला आ रहा है कि वोट सही जगह जा रहे हैं या नहीं? ऐसे में, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है और उसे अधिक सतर्क हो जाना चाहिए। ताकि लोकतंत्र में किसी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।
-संपादकीय

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