जिम्मेदारी बोझ नहीं, आत्मनिर्भरता है... - Kashi Patrika

जिम्मेदारी बोझ नहीं, आत्मनिर्भरता है...

जिम्मेदारी को अकसर मनुष्य बोझ की तरह लेता है और अपने कन्धों को हमेशा उसके बोझ से भारी महसूस करता है। जिम्मेदारी बोझ नहीं, आत्मनिर्भरता है, जो तुम्हें मजबूती देता है...
तुम्हारे माता-पिता कुछ कर रहे थे, क्योंकि उन्हें वे चीजें करना उनके माता-पिता ने सिखाया था, यानी उत्तरदायित्व का पालन। अब तुम्हारी बारी है अपना उत्तरदायित्व निभाने की। “उत्तरदायित्व” तुम्हें अपने अपराध बोध से हल्का करने में मदद करेगी। यह इसका अच्छा हिस्सा है, मनोविश्लेषण का लाभकारी हिस्सा है और नुकसान दायक हिस्सा यह है कि यह तुम्हें जिम्मेदार नहीं बनाता। मैं तुम्हें जिम्मेदारी सिखाता हूं।

जिम्मदारी से मेरा मतलब क्या है? तुम अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेदार नहीं हो, और तुम किसी परमात्मा के प्रति जिम्मेदार नहीं हो, और तुम किसी पंडित के प्रति जिम्मेदार नहीं हो--तुम अपने भीतर की चेतना के प्रति जिम्मेदार हो। जिम्मेदारी स्वतंत्रता है। जिम्मेदारी यह विचार है कि "मैं अपने जीवन की बागडोर अपने हाथ में लेता हूं। बहुत हो गया! मेरे माता-पिता जो कुछ भी कर सकते थे, वे कर चुके। अब मुझे प्रौढ़ व्यक्ति बनना है। मुझे हर चीज अपने हाथों में लेनी चाहिए और उस तरह से जीना शुरू करना चाहिए जैसा मेरे भीतर आता है। मुझे अपनी सारी ऊर्जा को मेरे जीवन के लिए देना चाहिए।’और तत्काल तुम महसूस करोगे कि बहुत सारी ऊर्जा तुम्हारे भीतर आएगी।

अपराध बोध से तुम कमजोर महसूस करते हो। जिम्मेदारी से तुम मजबूत महसूस करते हो। जिम्मेदारी तुम्हें फिर से साहस, आत्मविश्वास, श्रद्धा देतीहै।

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