सर्वे में ३ % लोगों ने हाँ में जबाब दिया। यह अकड़ा १७ % से काफी कम हैं जब लोगों ने २०१३ में सरकार की नीतियों से अपने जीवन में हो रहे बदलावों के विषय में हाँ में जवाब दिया था। इस आकड़े की खास बात यह हैं कि इसमें सबसे पहले वर्तमान मोदी सरकार को नकारने वाले लोगों में गांव के लोग जुड़े थे।
गांव के लोगों ने सबसे पहले सर्वे में १७ से ७ %, २०१४-१५ में अपने जीवन में हो रहे बदलावों के विषय में केंद्र सरकार की नीतियों को कोसना शुरू किया था। बाद में यह आकड़ा गिरते गिरते ३-४ % पर आ गया हैं। इन सब के वाबजूद सरकार की नीतियों में बदलाव न के बराबर हैं। चाहें गंगा के स्वक्ष होने का मुद्दा हो या लोगों के रोजगार का मुद्दा सरकार बगली झाकतें ही नजर आती हैं।
राजनीतिक गलियारों में हो रही सुगबुगाहट की माने तो बीजेपी एक बार फिर से बड़े पैमाने पर राम मंदिर के मुद्दे को भुनाने की तयारी में हैं। यह भी हो सकता हैं देश में २०१९ लोकसभा चुनावों से पहले ऐसा माहौल तैयार हो जाए कि बीजेपी २०१९ में राम मंदिर के मुद्दे को मुख्य रूप से लेकर चुनावों में उतरे।



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