बुद्धत्व यानी महा आनंद/ओशो - Kashi Patrika

बुद्धत्व यानी महा आनंद/ओशो

बुद्धत्व की परिभाषा है कि हर चीज वैसी ही है, जैसी की होनी चाहिए। हर चीज पूर्ण है। तुम्हें अहसास होता है कि  तुम इस पूर्णता के एक जैविक हिस्से हो, महानतम, सुंदर पूर्ण के...

बुद्धत्व और कुछ नहीं बस इतना ही है कि हर चीज वैसी ही है जैसी होनी चाहिए। यह बुद्धत्व की परिभाषा है: हर चीज वैसी ही है जैसी की होनी चाहिए, हर चीज पूरी तरह से पूर्ण है जैसी है। यह अहसास...और अचानक तुम घर पर होते हो। कुछ भी बाकी नहीं बचता। तुम हिस्से हो, एक जैविक हिस्से हो इस महानतम, सुंदर पूर्ण के। तुम इसमें विश्रांत हो, इसमें समर्पित। तुम अलग से नहीं बचते--सभी विभाजन विदा हो जाते हैं।

एक महा आनंद घटता है, क्योंकि अहंकार के विदा होते ही कोई चिंता नहीं बचती, अहंकार के विदा होने के साथ ही किसी तरह का पीड़ा नहीं बचती, अहंकार के विदा हो जाने के साथ ही किसी तरह की मृत्यु की संभावना नहीं बचती। यह बुद्धत्व है। यह समझ है कि सब कुछ शुभ है कि सब सुंदर है--और यह जैसा है वैसा ही सुंदर है। सब कुछ गहनतम लयबद्धता में है, तालमेल में है।

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