'अमृत-वाणी' - दूसरों को समझाने से आसान उनको समझना है।... - Kashi Patrika

'अमृत-वाणी' - दूसरों को समझाने से आसान उनको समझना है।...

एक बहुत बड़े ज्योतिष थे। हाथ पढ़ते थे। बड़े- छोटे उनके पास आकर भविष्य के बारे में जानकारी लेते थे। वर्तमान में ही भविष्य को जान लेना कौन नहीं चाहता। जोतिष हाथ पढ़ कर उपाय भी बताते। लोग कभी निश्चिंत हो कर तो कभी शंकालू बनकर वापस लौट जाते।

एक बार ऐसा हुआ के सनातन नाम का एक युवक फिर लौटा और जोतिष को बताते लगा के उन्होंने उसकी समस्या ठीक-ठीक नहीं बताई औऱ वह हताश हो कर वही बैठ गया।'थोड़े समय बाद जोतिष उसको खुले हवा में ले जाकर पूरी बात पूछते हैं।
सनातन ने अपनी समस्या कही, 'अभी भी मेरे लिए मेरा परिवार कुच्छ नहीं सोचता। किसी को भी मेरे होने न होने से मतलब नहीं। भविष्य में भी कुच्छ नया नहीं निकला।मैं जीवन में नकारात्मक हो गया हूँ।'
जोतिष दिल का अच्छा था, बोलता है , 'बेटा हाथ मे कुच्छ लिखा भी हो तो मैं जानकर नहीं हूँ, बस अपनी गृहस्थी चला रहा। लेकिन एक मंत्र कहता हूँ, जीवन में दूसरे हमारे लिए क्या करते है मत ध्यान दो, तुम परिवार,समाज के लिए क्या करते हो उनको गिनो। तुम अगले को सुंदर अनुभव कराते हो तब ही वह तुम्हें ज़रूरत पर संभाल लेता है।'

लड़का किसी तरह वापस घर को लौट गया। और जोतिष को मिलने औऱ संसार को समझने आता रहा। लेक़िन जोतिष ने अब उसका हाथ देखना बंद कर दिया था।

अदिति

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