क्या रामनगर औद्योगिक क्षेत्र वाराणसी का कोई भविष्य हैं ? - Kashi Patrika

क्या रामनगर औद्योगिक क्षेत्र वाराणसी का कोई भविष्य हैं ?

राष्ट्रीय राजमार्ग २ के नजदीक स्थित वाराणसी की औद्योगिक इकाई रामनगर की स्थापना सन १९७८ में की गई थी। इसके लिए दो बार नीतियाँ बनाई गई सन १९९१ और २००१ में, पर प्रगति की रफ़्तार धीमी की धीमी ही रही। यहाँ स्थपित २३२ प्लॉटस में से केवल १२० प्लॉट्स कार्यरत है। उनका भी विस्तार न के बराबर ही है तो क्या सरकार की नीतिया इतनी कमजोर है कि प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के वाबजूद यहाँ रोजगार के अवसर पैदा नहीं होने वाले हैं।

कितनी बार रामनगर इंडस्ट्रियल संघ के अध्यक्ष ने कहाँ हैं कि रामनगर इंडस्ट्रियल बेल्ट की सुविधाओं में इजाफा किया जाए तो यह पूर्वांचल का सबसे ज्यादा रोजगार उत्पन्न करने वाला क्षेत्र बन सकता हैं। पर सुविधाओं के नाम पर कभी बिजली की व्यवस्था ख़राब रहती हैं तो कभी ख़राब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से कार्य की प्रगति बाधित रहती हैं।

३०० करोड़ सालाना रेवन्यू देने वाली यह इंडस्ट्रियल यूनिट पूर्वांचल में सबसे ज्यादा रोजगार प्रदान करती  हैं पर सुविधाओं के आभाव में बहुत सी औद्योगिक इकाईया यहाँ से दूसरे राज्यों में स्थानांतरित हो चुकी हैं। २०१७ में जब राज्य में  भाजपा की सरकार आई तो लोगों को भरोसा हो चला की अब केंद्र और राज्य की सरकारें मिलकर यहाँ की दिन बदलेंगे। पर स्थिति जस की तस रही लगता नहीं कि सरकार का इस ओर कोई खास ध्यान हैं और न ही सरकार की इस ओर कार्य करने की कोई मंशा ही दिखाई देते हैं।

ऐसे में सुविधाओं के आभाव में और इकाईयां यहाँ से कहीं और स्थान्तरित हो जाए तो बड़ी बात नहीं होगी।  

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