सप्ताहांत - Kashi Patrika

सप्ताहांत

हफ्ते भर की खबरों का लेखाजोखा। 


आम जन के चश्में से देखे, तो स्विस बैंक में भारतीयों के जमा धन में 50 फीसदी इजाफे से स्तब्ध लोगों की संवेदना को  मंदसौर की खबर ने जमा सा दिया। रुपया गुरुवार को अपने निचले स्तर पर लुढ़का, वहीँ ‛कबीर’ के मगहर में प्रधानमंत्री की उपस्थिति चर्चा में रही। अमरनाथ यात्रा, कश्मीर, सीएम त्रिवेंद्र सिंह के ‛जनता दरबार’ ने सुर्खियां बटोरी, तो फिल्म “संजू” ने पैसा।


‛मंदसौर’ लिखने को शब्द नहीं
मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक सात वर्षीया मासूम रक्तरंजित है, घटना से पूरा शहर सड़क पर है। सुरक्षा व्यवस्था और कानून एक बार फिर कलंकित हैं। किंतु, वाक्या इतना कष्टदायी है कि मेरे पास लिखने को शब्द नहीं हैं। गंभीर हालत में बच्ची का इंदौर के एमवाय अस्पताल में इलाज चल रहा है। तीसरी कक्षा की उस नन्ही छात्रा को वहशी हमले का शिकार बनाने वाले इरफान और आसिफ नामक दोनों आरोपी पुलिस रिमांड में हैं। पुलिस का कहना है कि सात दिन में डीएनए टेस्ट कराकर 20 दिन में चालान पेश कराकर अभियुक्त को फांसी की सजा दिलाई जाएगी। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने पॉक्सो कानून में बदलाव किया है, जिसके मुताबिक 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार के मामले में दोषियों को फांसी की सजा देने को मंजूरी दी गई है।
गौर करने की एक और बात है कि इसी हफ्ते महिलाओं की सुरक्षा को लेकर थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सर्वेक्षण में भारत की स्थिति सीरिया और अफगानिस्तान जैसे युद्ध ग्रस्त देशों से भी कमजोर होने की बात सामने आई। इस रिपोर्ट के मुताबिक यौन उत्पीड़न और बंधुआ मजदूरी जैसी वजहों के चलते भारत महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देशों में पहले स्थान पर आया है। महिला आयोग ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, लेकिन मंदसौर की घटना सुरक्षा, प्रशासन, सरकार सभी को कठघरे में खड़ा करती है या आम इंसान का दर्द किसी को नहीं छूता!

काला धन: ढाक के तीन पात

केंद्र सरकार के वादों की फेहरिस्त में “काला धन” ऊपर की पंक्ति में आता है, क्योंकि दावा था, ‛स्विस बैंक से सारा काला धन वापस आएगा और हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए जमा होंगे।’ जनता आस लगाए बैठी रही और चार साल खिसक गए। इस बीच नोटबंदी के दौरान लंबी पंक्ति में खड़े होने का दर्द भी भूल गई, लेकिन स्विस बैंक के ताजा आंकड़ों से दर्द फिर हरा हो गया। स्विस नेशनल बैंक की ओर से जारी आंकड़ों से यह बात सामने आई है कि पिछले साल स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा 50 फीसदी बढ़कर 1.01 अरब स्विस फ्रैंक (करीब सात हजार करोड़ रुपए) पर पहुंच गया है। खबर सामने आने के साथ ही सियासत तेज हो गई। विपक्ष को जहां केंद्र सरकार को घेरने का मौका मिल गया है, वहीँ सरकार बचाव करती दिख रही है। लेकिन, ‛बात निकली है, तो दूर तलक जाएगी...।’ चुनाव जीतने के लिए वादे करते समय कानून के दायरे, मुश्किलों, मुसीबतों, लगने वाले समय...इन बातों की चर्चा करने से अकसर सियासतदार चूक जाते हैं या जानबूझकर नहीं करते!
फिलहाल, आंकड़ों के मुताबिक स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का पैसा तीन साल से गिर रहा था, जिसमेँ 2016 की गिरावट सबसे बड़ी थी। लेकिन साल 2017 में कहानी पलट गई है और जहां अन्य विदेशी ग्राहकों का पैसा 2017 में सिर्फ 3 फीसदी बढ़ा, वहीँ भारतीयों का 50 प्रतिशत। SNB के मुताबिक स्विस बैंकों में भारतीयों का जो पैसा है, उनमें व्यक्तिगत रूप से जमा धन बढ़कर 3200 करोड़ रुपए, दूसरे बैंकों के जरिए जमा रकम 1050 करोड़ रुपए और प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) के रूप में 2640 करोड़ रुपए शामिल है।
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का तर्क है कि विपक्ष गलत प्रचारित कर रहा है क्योंकि स्विस बैंक में जमा सारा धन काला नहीं है, जबकि केंद्रीय मंत्री पीयूष ने कहा, 'केंद्र काले धन से जुड़ा सारा डाटा अगले साल तक ले आएगा।’ हालत यह है कि विपक्ष ही नहीं भाजपा के सुब्रमण्यम स्वामी भी इस मुद्दे पर तर्कों से सन्तुष्ट नहीं हैं।
विभिन्न मुद्दों पर ‛मजबूरियां’ गिनाना तो पिछली केंद्र सरकार को भी आता था और शायद आगे भी सरकारें इसी परिपाटी पर चलती रहेंगी और सियासत अपने आप को दोहराता रहेगा।

खस्ताहाल रुपया: वही पुरानी कहानी

डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी को लेकर कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार भी रुपए की हालत सुधार नहीं पा रही है। भारतीय मुद्रा की मौजूदा हालत सामान्य उतार-चढ़ाव से अलग और बेहद चिंताजनक है। भारतीय करेंसी गुरुवार को अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर (1 डॉलर 69 रुपए) पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपए का अभी और अवमूल्यन हो सकता है और एक डॉलर के मुकाबले 72 रुपए तक चुकाने पड़ सकते हैं। ऐसे में, महंगाई तो बढ़ेगी ही, भारतीयों के लिए विदेश यात्रा करना, वहां पढ़ाई का खर्च भी बढ़ जाएगा।

जनता दरबार में “गुरुर” 

चुनाव के वक्त जनता दरबार में हाजिरी लगाकर करबद्ध निवेदन करने वाले नेतागण के तेवर सत्ता पाते ही किस कदर बदल जाते हैं, यह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समाचार चैनल पर दिखाई जा रहे ‛जनता दरबार’ में देखने को मिला। तारीख, 28 जून त्रिवेंद्र सिंह का दरबार सजा था, जनता के दुख, समस्याओं की सुनवाई चल रही थी। माइक उत्तरकाशी में 20 से ज्यादा सालों से टीचर उत्तरा पंत बहुगुणा के हाथ में आता है। वो कहना शुरू करती हैं, ''मेरी समस्या ये है कि मेरी पति की मौत हो चुकी है। मेरे बच्चों को कोई देखने वाला नहीं है। घर पर मैं अकेली हूं, अपने बच्चों का सहारा। मैं अपने बच्चों को अनाथ नहीं छोड़ सकती और नौकरी भी नहीं छोड़ सकती। आपको मेरे साथ न्याय करना होगा।''
न्याय की इस फरियाद को सुनकर रावत उत्तरा से सवाल पूछते हैं, ''जब नौकरी की थी तो क्या लिखकर दिया था?'' उत्तरा जवाब देती हैं, ''लिखकर दिया था सर। ये नहीं बोला था कि मैं वनवास भोगूंगी ज़िंदगीभर। ये आपका है 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।’ और ये नहीं कि वनवास के लिए भेज रहे हैं हमको ससुराल।''
त्रिवेंद्र उत्तरा को टोककर कहते हैं, "अध्यापिका हो। ठीक से बोलो जरा। नौकरी करती हो न जरा सभ्यता सीखो। मैं सस्पेंड कर दूंगा अभी। अभी सस्पेंड हो जाओगी। इसको सस्पेंड कर दो अभी। सस्पेंड करो आज ही। ले जाओ इसको उठाकर बाहर। बंद करो इसको। जाओ इसको ले जाओ। इसको कस्टडी में लो।''
त्रिवेंद्र के पुलिस अधिकारियों को आदेश देने के दौरान उत्तरा कहती हैं, ''मैं अध्यापिका हूं तो अध्यापिका के क्या गुण होते हैं?... आप मुझे क्या सस्पेंड करोगे। मैं खुद घर पर बैठी हूं। निशंक जी ने भी यही.... सुनिए हर कोई नेता होता है. हमारी भी भावनाएँ होती हैं... चोर उचक्के कहीं के. भक्क।''इस पूरे वाकये के बाद त्रिवेंद्र सिंह के आदेशानुसार पुलिस वाले उत्तरा को बाहर लाते हैं।
जनता दरबार के बाद मीडिया से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते हैं, ''ये हमेशा कुछ न कुछ ऐसे लोग घुस जाते हैं। एक आधी बार ऐसा हो ही जाता है। कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन अपनी मर्यादाओं में रहना चाहिए।" हो सकता है कि गलती याचिका की हो, पर जब “तंत्र” वोट की याचना के लिए आता है, तब “लोक” के पास पुलिस-प्रशासन नहीं होता, इसलिए वह अपनी नाराजगी इस कदर जाहिर नहीं कर पाता! बात यह भी है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी भी शिक्षिका हैं और लंबे समय से देहरादून में ही सेवारत हैं! नियम-कानून के दायरे क्या सिर्फ आम जन के लिए है या सत्ता चीज ही ऐसी है कि नीयत बदल देती है!

मगहर का हाथ खाली

चार साल की सत्ता के बाद अचानक प्रधानमंत्री के हृदय में कबीर और मगहर के प्रति प्रेम जागना, सवालों को जन्म दे, यह स्वाभाविक है। फिर राजनीतिक जानकारों की माने और आकड़ों पर नजर डालें तो समझना मुश्किल नहीं की ‛कबीर क्यों बाजार में खड़ा है।’ कबीर पंथियों की संख्या देशभर में करीब चार करोड़ है और यूपी के लालगंज, आजमगढ़, सलेमपुर, घोसी, बलिया, बस्ती, डुमरियागंज, संत कबीर नगर, महराजगंज,  गोरखपुर, बांसगांव, कुशीनगर व देवरिया में इसका विशेष प्रभाव भी है और आस्था भी।
खैर, इन बातोँ से इतर एक और सच यह है कि प्रधानमंत्री के ‛मगहर’ आगमन से यहां के बाशिंदों में आस जागी थी कि उनकी दशा में सुधार होगा और सौगात से उन्हें कुछ राहत मिलेगी। बता दे कि यहाँ रहने वालों में ज्यादातर जुलाहे हैं और भिन्न-भिन्न कारणों से करघा बंद है, गांधी आश्रम में गिने-चुने कारीगर रह गए हैं, जिनके लिए वेतन भी नहीं जुट पाता। यहां के स्थानीय निवासियों के अनुसार कपड़े का काम छोड़कर लोग रिक्शा चलाने, सब्जी बेचने या खेत में मजदूरी करने को बेबस हैं। ऐसे में पीएम के आने की खबर से उनमेँ उत्साह था कि वे उनसे मिलेंगे और हाल जानेंगे। कुछ ऐसा नहीं हुआ। मगहर से भाजपा को कितना फायदा होगा यह तो वक्त बताएगा, फिलहाल मगहर का हाथ खाली है। 

अमरनाथ यात्रा में रुकावट

लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम की वजह से अमरनाथ यात्रा एक बार फिर रोक दी गई है। खबरों के मुताबिक पहलगाम रूट पर जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। इसकी वजह से इस रूट पर यात्रा रोकी गई है। इससे पहले बालटाल रूट पर भी खराब मौसम की वजह से यात्रा रोक दी गई थी। जम्मू पुलिस कंट्रोल रूम के मुताबिक खराब मौसम की वजह से बालटाल और पहलगाम रूट पर सड़कों की हालत भी खराब है। ऐसे में आज यात्रा स्थगित रहेगी। एएनआई के मुताबिक अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं का तीसरे जत्थे को भूस्खलन की वजह से टिकरी बेस कैंप पर रोकना पड़ा है। इस जत्थे ने भगवती नगर बेस कैंप से यात्रा प्रारंभ की थी और पहलगाम रूट के जरिये यात्रा के लिए जा रहे थे।
अमरनाथ यात्रा पर पहले से आतंकियों की बुरी नजर है, जिसे देखते हुए सरकार की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इलेक्ट्रोमेगनेटिक चिप, बाइक, बुलेटप्रूफ एसयूवी से लैस पुलिस काफिले और जगह-जगह बुलेटप्रूफ बंकर बनाए गए हैं। दूसरी तरफ श्राद्धलुओं के भी हौसले बुलन्द हैं अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन‍ कराया है।

ओपनिंग में अव्वल “संजू”

अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी पर आधारित रणबीर कपूर की फिल्म 'संजू’ को साल 2018 की सबसे बड़ी ओपनिंग मिली है। 'संजू' ने ओपनिंग डे पर 32 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की है और कलेक्शन के मामले में सलमान खान स्टारर 'रेस-3', टाइगर श्रॉफ की 'बागी-2', दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत 'पद्मावत' को पीछे छोड़ दिया है। 'संजू' की जान, रणबीर कपूर हैं और फिल्म को लेकर दर्शकों में अच्छा क्रेज है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सौ करोड़ लागत से बनी यह फिल्म महज तीन दिन में ही अपनी लागत निकाल लेगी।

अंततः कबीर की पंक्ति-
“आय हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर।
एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बँधे जात जंजीर॥”

■ सोनी सिंह

No comments:

Post a Comment