देश का सर्वोच्च न्यायालय “निर्भया रेप एवं हत्या मामले” से जुड़ी रिव्यू पेटिशन पर आज अपना फैसला सुना सकता है। तकरीबन छह साल का लंबा वक्त बीत गया। इस बीच कोर्ट के चक्कर, फैसले, कुछ उम्मीदें फिर न्यायिक प्रक्रियाएं, मीडिया के सवाल, कहीं से सहानुभूति तो कहीं से परेशान करती आवाजे सब कुछ सहती निर्भया की मां को साल 2012 में 16 दिसंबर की रात हुई उस भयावह घटना के मामले में आज भी न्याय का इन्तजार है। इस घटना से देश आंदोलित हुआ। वर्मा कमिशन की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने नया एंटी रेप लॉ बनाया। इसके लिए आईपीसी और सीआरपीसी में तमाम बदलाव किए गए, और इसके तहत सख्त कानून बनाए गए। साथ ही रेप को लेकर कई नए कानूनी प्रावधान भी शामिल किए गए, लेकिन इतनी सख्ती और इतने आक्रोश के बावजूद रेप के मामले नहीं रुके, बल्कि परिस्थितियां और बिगड़ती ही गईं।
छह साल में मन्दसौर, कठुआ, उन्नाव सहित कितने मामले सामने आए, इंसानियत शर्मसार हुआ और रेप के मामलों की संख्या में इजाफा होता गया। 2018 में हालात यह है कि महिला सुरक्षा के मामले में भारत विश्व का सबसे खतरनाक देश बन चुका है। तथाकथित संत से लेकर शिक्षक तक बलात्कारियों की सूची में शामिल हैं। सबसे ज्यादा चिंता का विषय यह है कि रेप के ज्यादातर मामलों में आरोपी परिचित होता है। इस बात की पुष्टि भारत सरकार की संस्था नेशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो यानी एनसीआरबी ने की है। 2016 में भारत में दर्ज अपराध के आंकड़े बताते हैं कि बलात्कार के 94.6 प्रतिशत आरोपी या तो रिश्तेदार होते हैं या परिचित। इनमें पिता, भाई, दादा, प्रेमी और पड़ोसी कोई भी हो सकता है।
एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2017 में देश में 28,947 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज की गयी। इसमें मध्यप्रदेश में 4882 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज हुई, जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश 4816 और महाराष्ट्र 4189 की संख्या के साथ देश में दूसरे और तीसरे राज्य के तौर पर दर्ज किये गये हैं। इसके साथ ही नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले में भी मध्यप्रदेश देश में अव्वल स्थान पर है। मध्यप्रदेश में इस तरह के 2479 मामले दर्ज किये गये, जबकि इस मामले में महाराष्ट्र 2310 और उत्तरप्रदेश 2115 के आंकड़े के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। पूरे भारत में 16,863 नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले दर्ज किये गये हैं।
निर्भया कांड के बाद दिल्ली में दुष्कर्म के दर्ज मामलों में 132 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। साल 2017 में अकेले जनवरी महीने में ही दुष्कर्म के 140 मामले दर्ज किए गए थे। मई 2017 तक दिल्ली में दुष्कर्म के कुल 836 मामले दर्ज किए गए।
आखिर, ऐसे मामलों में कानूनन बदलावों के बाबजूद आरोपियों में डर क्यों नहीं है और ऐसी घटनाओं की संख्या घटने की बजाय बढ़ क्यों रही हैं?शायद लचर पुलिस प्रशासन और हमारी जटिल कानून व्यवस्था! जिसका उदाहरण निर्भया मामला ही है, यह केस साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया था, लेकिन आज 2018 तक भी इसमें फैसला नहीं आया है। और बहुत हद तक हमारा समाज भी ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार है, जो सारी नसीहतें और सभ्यता की पाठ सिर्फ बेटियों को पढ़ाता है, लेकिन बेटों को पढ़ाना भूल जाता है।
■ संपादकीय
छह साल में मन्दसौर, कठुआ, उन्नाव सहित कितने मामले सामने आए, इंसानियत शर्मसार हुआ और रेप के मामलों की संख्या में इजाफा होता गया। 2018 में हालात यह है कि महिला सुरक्षा के मामले में भारत विश्व का सबसे खतरनाक देश बन चुका है। तथाकथित संत से लेकर शिक्षक तक बलात्कारियों की सूची में शामिल हैं। सबसे ज्यादा चिंता का विषय यह है कि रेप के ज्यादातर मामलों में आरोपी परिचित होता है। इस बात की पुष्टि भारत सरकार की संस्था नेशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो यानी एनसीआरबी ने की है। 2016 में भारत में दर्ज अपराध के आंकड़े बताते हैं कि बलात्कार के 94.6 प्रतिशत आरोपी या तो रिश्तेदार होते हैं या परिचित। इनमें पिता, भाई, दादा, प्रेमी और पड़ोसी कोई भी हो सकता है।
एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2017 में देश में 28,947 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज की गयी। इसमें मध्यप्रदेश में 4882 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज हुई, जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश 4816 और महाराष्ट्र 4189 की संख्या के साथ देश में दूसरे और तीसरे राज्य के तौर पर दर्ज किये गये हैं। इसके साथ ही नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले में भी मध्यप्रदेश देश में अव्वल स्थान पर है। मध्यप्रदेश में इस तरह के 2479 मामले दर्ज किये गये, जबकि इस मामले में महाराष्ट्र 2310 और उत्तरप्रदेश 2115 के आंकड़े के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। पूरे भारत में 16,863 नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले दर्ज किये गये हैं।
निर्भया कांड के बाद दिल्ली में दुष्कर्म के दर्ज मामलों में 132 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। साल 2017 में अकेले जनवरी महीने में ही दुष्कर्म के 140 मामले दर्ज किए गए थे। मई 2017 तक दिल्ली में दुष्कर्म के कुल 836 मामले दर्ज किए गए।
आखिर, ऐसे मामलों में कानूनन बदलावों के बाबजूद आरोपियों में डर क्यों नहीं है और ऐसी घटनाओं की संख्या घटने की बजाय बढ़ क्यों रही हैं?शायद लचर पुलिस प्रशासन और हमारी जटिल कानून व्यवस्था! जिसका उदाहरण निर्भया मामला ही है, यह केस साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया था, लेकिन आज 2018 तक भी इसमें फैसला नहीं आया है। और बहुत हद तक हमारा समाज भी ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार है, जो सारी नसीहतें और सभ्यता की पाठ सिर्फ बेटियों को पढ़ाता है, लेकिन बेटों को पढ़ाना भूल जाता है।
■ संपादकीय


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