पूर्वांचल में खौफ और गैंगवार का सबसे बड़ा नाम रहा मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस मामले में बजरंगी की पत्नी की आशंका आखिर सही साबित हुई। जेल में हुए इस हत्याकांड के बाद जेल प्रशासन से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मचा है, वहीँ यूपी के जेल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं।
मुन्ना बजरंगी भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में जेल में बंद था। उस पर दर्जनों मुकदमे हत्या, लूट के दर्ज थे। पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी। इसी कारण उसे रविवार देर रात झांसी जेल से बागपत लाया गया था। बताया जा रहा है कि कुख्यात अपराधी सुनील राठी और विक्की सुनहेड़ा के साथ उसे अलग बैरक में रखा गया था। इस मामले में बागपत के जेलर, डिप्टी जेलर समेत चार जेलकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। न्यायिक जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
29 जून को जताई थी आशंका
29 जून को मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने कहा था, "मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक ये बात पहुंचाना चाहती हूं कि मेरे पति की जान को खतरा है। उन्हें उचित सुरक्षा दी जाए। उनके फर्जी एनकाउंटर की साजिश रची जा रही है। यूपी एसटीएफ, पुलिस के अधिकारी और कुछ सफेदपोश षड्यंत्र कर रहे हैं कि उन्हें फर्जी एनकाउंटर में मार दिया जाए।"
झांसी जेल में मुन्ना बजरंगी के ऊपर जानलेवा हमला किया गया। कुछ प्रभावशाली नेता और अधिकारी मुन्ना की हत्या करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। सीमा ने कहा था कि जेल में ही उसके पति के खाने में जहर देने की कोशिश की गई। सीसीटीवी फुटेज में भी इसकी रिकॉर्डिंग है, जिसमें एक एसटीएफ अधिकारी जेल में ही मुन्ना बजरंगी को मारने की बात कह रहे हैं। इसकी शिकायत कई अधिकारियों और न्यायालय से की, लेकिन कहीं से भी सुरक्षा नहीं मिली।
पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मुन्ना बजरंगी को 10 गोलियां मारी गईं हैं। बजरंगी परिवार की ओर से हत्या का शक सुनील राठी पर लगाया जा रहा है।
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