बेबाक हस्तक्षेप - Kashi Patrika

बेबाक हस्तक्षेप

देशभर में इन दिनों भीड़ द्वारा कानून को हाथ में लेने या भीड़ के उन्मादी होने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। ताजा घटना महाराष्ट्र धुले जिले के आदिवासी इलाके की है, जहां में बच्चा चोरी करने के शक में भीड़ ने पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी। बीते सप्ताह ही महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के शहादा इलाके में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब भीड़ ने तीन लोगों पर बच्चा चोर गिरोह होने के शक में बुरी तरह घायल कर दिया था।
समाज में बढ़ती हिंसा का सिर्फ यही उदाहरण नहीं है, बल्कि मामूली बातों पर रंजिश के चलते, अफवाह और शक के आधार पर, किसी उन्माद में या फिर कई बार क्षणिक उत्तेजना में लोग बड़े सहज भाव से हिंसा करते देखे जाने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से बच्चा चोरी के शक में देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। गुजरात, असम, झारखंड आदि के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। स्थिति चिन्तनीय है क्योंकि लोग तथ्य को समझने की कोशिश किए बिना इस कदर असहनशील हो रहे हैं, यानी हिंसक प्रवित्ति बढ़ रही है। चिंता का विषय यह भी है कि लोगों द्वारा स्वयं कानून को हाथ में लेना यह भी इशारा करता है कि जनता का विश्वास कानून पर से डोल रहा है। दोनों ही बात राष्ट्रहित में नहीं है।

खासकर ऐसे ज्यादातर मामले आदिवासी या पिछड़े इलाकों में सामने आएं, जहां गरीबी और अशिक्षा है। यह भी गौर करने का विषय है कि ऐसी घटनाएं के पीछे सोशल मीडिया भी परोक्ष रूप से भागीदार रही। महाराष्ट्र की दोनों घटनाएं जहां हुईं पुलिस के मुताबिक काफी समय से सोशल मीडिया पर इन इलाकों में बच्चे चुराने वाले गिरोहों के सक्रिय होने की अफवाह फैलाई जा रही थी। इसके चलते भी लोगों का बाहरी लोगों पर संदेह गहरा होता है और वे उनके खिलाफ हिंसक रुख अख्तियार कर लेते हैं।

बहरहाल, सच यह भी है कि भारत में बच्चों की चोरी और मानव तस्करी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। आदिवासी और पिछड़े इलाकों में समस्या गंभीर है,जहां गरीबी अधिक है, बच्चे चुराना या फिर उनके माता-पिता को बरगला कर शहरों में काम दिलाने के नाम पर कम उम्र के बच्चों को ले आना बहुत आसान है। झारखंड का पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थिति बद से बदतर है, जहां हर माह 10 से 20 बच्चों की तस्करी हो रही है। किसी माह यह आंकड़ा 30 के भी पार पहुंच जाता है। हालांकि, मानव तस्करी के मामले में पश्चिम बंगाल पहले नंबर पर है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरों के अनुसार 2016 में देश भर में मानव तस्करी की कुल 8,132 शिकायतों में से 3,576 केवल इसी राज्य से आईं। सूची में इस बार राजस्थान दूसरे नंबर पर रहा जहां 1,422 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद गुजरात में 548, महाराष्ट्र में 517 और तमिलनाडु में 434 मामले दर्ज किए गए। मानव तस्करी के बढ़ते मामलों पर नकेल कसने में शासन-प्रशासन लाचार दिख रहा है। सरकार की ओर से कुछ कोशिशें जरूर हो रही हैं, लेकिन वो नाकाफी है। मंदसौर की घटना को लेकर भी सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग आक्रामक हैं।

कुल मिलाकर, भीड़ द्वारा कानून को हाथ में लेने या किसी विषय को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ते उन्माद, असहनशीलता इस ओर इंगित कर रहा है कि देश के कानून और उसे लागू करने में सहायक तंत्र से लोगों का विश्वास डिगा है।
■ संपादकीय

No comments:

Post a Comment