प्रधानमंत्री मोदी के 14 व 15 जुलाई के प्रस्तावित वाराणसी दौरे के मद्देनजर मोदी ने अपनी टीम के सबसे बड़े सूत्रधार अमित शाह को पूर्वांचल के दौरे पर भेज दिया हैं। ये ठीक वैसा ही दौरा है, जो कभी 2014 लोकसभा चुनावों के पहले हुआ था। इस बार इस दौरे में 2014 से ज्यादा धन-बल के इस्तेमाल के संकेत मिल रहे हैं। आज (बुधवार) मिर्जापुर पहुंचकर अमित शाह ने माँ विंध्यवासिनी का आशीर्वाद लेकर पूर्वांचल में राजनीति का शंखनाद कर दिया।
एक ओर आज जहाँ मोदी के हाथ में प्रशासनिक अमला है, तो दूसरी ओर बड़े व्यापारियों का एक सुसंगठित दल। बीते चार सालों में बीजेपी ने खुलकर अपने सहयोगियों का विकास किया हैं और आज धरातल पर इसके प्रमाण भी मिलते हैं। तो क्या ये मान लिया जाए कि लोकतंत्र में चाहे जनता कितनी भी त्रस्त क्यों न हो; उसे दिखावे और छलावे की राजनीति से साधा जा सकता हैं।
राजनेताओं की आवाभगत में पुलिस प्रशासन
पुलिस महकमा राजनेताओं की आवाभगत में लगा दिया गया हैं। ऐसे में आम जनता की कठनाइयों को सुलझाने का समय पुलिस प्रशासन के पास 15 जुलाई तक नहीं ही रहेगा। ये एक आम बात हो गई हैं और मोदी की अगुवाई में लगी पुलिस भी ये खूब समझती हैं, हां इसका असर आम जनता पर कितना होता हैं इसका आकलन न तो कोई करने की जहमत उठता हैं और न ही इस पर मंथन करने की किसी को आवश्यकता जान पड़ती हैं। जब सरकार स्वयं यहाँ चल कर आ रही हैं, तो मजाल हैं कि कोई परिंदा भी प्रशासन के इतर पर फड़फड़ाए।
कांग्रेस नेता नजरबंद!
अमित शाह के विरोध की खबरों से सतर्क पुलिस ने शाह के मिर्जापुर पहुंचने से कुछ ही देर पहले अचानक ही पुलिस एनएसयूआई नेता सतीश मिश्रा के घर जा धमकी। सतीश मिश्रा घर के अंदर ही मौजूद हैं। उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि उन्हें घर में ही नजरबंद किया गया है।
रोजगार के इतर सब कुछ
मोदी अभी तक विपक्ष और आम जनता के रोजगार के मुद्दे पर संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए हैं। और लगता हैं उनका ये पूर्वांचल दौरा भी वैसा ही होने वाला हैं। पूर्वांचल में जहाँ बिहार के बाद सबसे ज्यादा बेरोजगारी हैं, वहां मोदी ने अपने चार सालों के कार्यकाल में ऐसी कोई भी नीति नहीं बनाई, जो भारत के इस सबसे पिछड़े क्षेत्र को गरीबी और भुखमरी से बचा सके। मोदी इस बार रेल मंत्रालय के क्रियाकलापों का लोकार्पण करेंगे। तो शायद मोदी के जहन में ये बात जरूर कचोटेगी की अपने चार सालों के कार्यकाल में उन्होंने केवल रेलवे की एक भर्ती को हरी झंडी दी हैं। जिस भर्ती को वो छः महीने भर में पूरा करने वाले थे उसमें उन्होंने 3 साल का समय लगा दिया। खैर, जिस सरकार के अपरोक्ष रचनाकार ‛भीख मांगने’ को रोजगार और पकौड़े बेचने को पढ़ेलिखे लोगों का भविष्य बता सकते हैं, उनसे कितनी उम्मीद की जा सकती हैं ये जनता खूब समझती हैं। हालांकि, सूत्रों की मानें तो, आज रात मिर्जापुर से वाराणसी पहुंचे अमित शाह ने यहाँ बीजेपी वालंटियर से बातचीत कर सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को किस तरह साधा जाए।
सीएम बने रहे साथ
अमित शाह के बाबतपुर हवाई अड्डे पर आगमन से पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंच गये थे। सीएम योगी ने अमित शाह की आगवनी की। इसके साथ साथ ही मिर्जापुर गये। वहां से बनारस भी साथ ही आये।
चुनावी चाय पिलाते मोदी के रचनाकार
मोदी के आने से पहले पूरे पूर्वांचल में ये चर्चा आम हो गई हैं कि क्या मोदी इस बार भी अपने चुनावी अभियान में सभी को चाय पिलाएंगे। 2014 की चाय आम जनता पर काफी भारी पड़ी हैं। ऐसे में आम जनता इस बार मोदी की चाय काफी सतर्कता से पीने के मूड में हैं। एक ओर सरकार के खिलाफ आक्रोश जनता में दिनों दिन बढ़ता जा रहा हैं तो दूसरी ओर मोदी ये समझने को तैयार ही नहीं हैं कि ये लोकतंत्र हैं न कि राजतंत्र।
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एक ओर आज जहाँ मोदी के हाथ में प्रशासनिक अमला है, तो दूसरी ओर बड़े व्यापारियों का एक सुसंगठित दल। बीते चार सालों में बीजेपी ने खुलकर अपने सहयोगियों का विकास किया हैं और आज धरातल पर इसके प्रमाण भी मिलते हैं। तो क्या ये मान लिया जाए कि लोकतंत्र में चाहे जनता कितनी भी त्रस्त क्यों न हो; उसे दिखावे और छलावे की राजनीति से साधा जा सकता हैं।
राजनेताओं की आवाभगत में पुलिस प्रशासन
पुलिस महकमा राजनेताओं की आवाभगत में लगा दिया गया हैं। ऐसे में आम जनता की कठनाइयों को सुलझाने का समय पुलिस प्रशासन के पास 15 जुलाई तक नहीं ही रहेगा। ये एक आम बात हो गई हैं और मोदी की अगुवाई में लगी पुलिस भी ये खूब समझती हैं, हां इसका असर आम जनता पर कितना होता हैं इसका आकलन न तो कोई करने की जहमत उठता हैं और न ही इस पर मंथन करने की किसी को आवश्यकता जान पड़ती हैं। जब सरकार स्वयं यहाँ चल कर आ रही हैं, तो मजाल हैं कि कोई परिंदा भी प्रशासन के इतर पर फड़फड़ाए।
कांग्रेस नेता नजरबंद!
अमित शाह के विरोध की खबरों से सतर्क पुलिस ने शाह के मिर्जापुर पहुंचने से कुछ ही देर पहले अचानक ही पुलिस एनएसयूआई नेता सतीश मिश्रा के घर जा धमकी। सतीश मिश्रा घर के अंदर ही मौजूद हैं। उनके घर के बाहर पुलिस तैनात कर दिया गया है। ऐसा लग रहा है कि उन्हें घर में ही नजरबंद किया गया है।
केंद्र की वाहवाही
एक तरफ केन्द्र सरकार किसानों को राहत देने के लिए एमएसपी देने का ऐलान कर रही थी, तो दूसरी तरफ किसानों के महत्वपूर्ण जिले मिर्जापुर में खुद अमित शाह ने सरकार के इस निर्णय को किसानों के लिए दीपावली बताया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक निर्णय करार दिया।
एनडीए के साझीदार से जनता नाराज
अमित शाह ने भले ही अपना दल के भरुहना स्थित कार्यालय जाकर केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल व आशीष पटेल के साथ बैठ कर एनडीए के कुनबे को मजबूत करने का प्रयास किया। किंतु, सूत्रों के मुताबिक यहाँ की जनता मंत्री अनुप्रिया पटेल से नाखुश है। खासकर सवर्णों में उनके प्रति नाराजगी है।
मोदी अभी तक विपक्ष और आम जनता के रोजगार के मुद्दे पर संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए हैं। और लगता हैं उनका ये पूर्वांचल दौरा भी वैसा ही होने वाला हैं। पूर्वांचल में जहाँ बिहार के बाद सबसे ज्यादा बेरोजगारी हैं, वहां मोदी ने अपने चार सालों के कार्यकाल में ऐसी कोई भी नीति नहीं बनाई, जो भारत के इस सबसे पिछड़े क्षेत्र को गरीबी और भुखमरी से बचा सके। मोदी इस बार रेल मंत्रालय के क्रियाकलापों का लोकार्पण करेंगे। तो शायद मोदी के जहन में ये बात जरूर कचोटेगी की अपने चार सालों के कार्यकाल में उन्होंने केवल रेलवे की एक भर्ती को हरी झंडी दी हैं। जिस भर्ती को वो छः महीने भर में पूरा करने वाले थे उसमें उन्होंने 3 साल का समय लगा दिया। खैर, जिस सरकार के अपरोक्ष रचनाकार ‛भीख मांगने’ को रोजगार और पकौड़े बेचने को पढ़ेलिखे लोगों का भविष्य बता सकते हैं, उनसे कितनी उम्मीद की जा सकती हैं ये जनता खूब समझती हैं। हालांकि, सूत्रों की मानें तो, आज रात मिर्जापुर से वाराणसी पहुंचे अमित शाह ने यहाँ बीजेपी वालंटियर से बातचीत कर सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को किस तरह साधा जाए।
सीएम बने रहे साथ
अमित शाह के बाबतपुर हवाई अड्डे पर आगमन से पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंच गये थे। सीएम योगी ने अमित शाह की आगवनी की। इसके साथ साथ ही मिर्जापुर गये। वहां से बनारस भी साथ ही आये।
चुनावी चाय पिलाते मोदी के रचनाकार
मोदी के आने से पहले पूरे पूर्वांचल में ये चर्चा आम हो गई हैं कि क्या मोदी इस बार भी अपने चुनावी अभियान में सभी को चाय पिलाएंगे। 2014 की चाय आम जनता पर काफी भारी पड़ी हैं। ऐसे में आम जनता इस बार मोदी की चाय काफी सतर्कता से पीने के मूड में हैं। एक ओर सरकार के खिलाफ आक्रोश जनता में दिनों दिन बढ़ता जा रहा हैं तो दूसरी ओर मोदी ये समझने को तैयार ही नहीं हैं कि ये लोकतंत्र हैं न कि राजतंत्र।
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