सैकड़ों वर्षों से भारत गावहीं देता आया हैं कि यहाँ की जनता में ही मुख्य सत्ता निहित हैं। आज आप इतिहास के पन्ने पलट कर देख लीजिए; किसी भी राजा की सत्ता की चाभी उसकी जनता में ही निहित रही हैं। मध्यकालिक इतिहास में भी जब बाहरी शक्तियों ने भारत में शासन किया तो वो केवल राजतंत्रात्मक सत्ता परिवर्तन करने में ही सफल हुए न कि भारत की जनता को जीत सके।
इस महान जनता ने ही सदियों के अत्याचारों को सहते हुए आधुनिक भारत का निर्माण किया हैं। अक्सर इस जनता को सत्ता का साथ न के बराबर मिलता आया हैं फिर चाहे वो राजतंत्र हो या लोकतंत्र।
आज वर्तमान सरकार का ट्रेक रिकॉर्ड तो इतना ख़राब हैं कि उसने अपने चार साल केवल जनता को दिग्भ्रमित करने में बिता दिए। पांचवा साल भी इस से इतर कुछ और नहीं बीत रहा हैं। तो आज के परिपेक्ष में इस सरकार को कितने नंबर दिए जाए, ये जनता खूब अच्छे से जानती हैं। विपक्ष एक बार फिर से केंद्र की सत्ता पर हावी होता जा रहा हैं और नित नए गठजोड़ सामने आ रहे हैं।
जनता जब एक बार मन बना लेती हैं तो अच्छे-अच्छे तानाशाह को उखाड़ फेकती हैं फिर माध्यम चाहे अहिंसा ही क्यों न हो, ऐसा ही कुछ अंग्रेजी हुकूमत के साथ भी हुआ था जिसको जनता ने संगठित होकर केवल अहिंसा के रास्ते से उख़ाड़ फेका था। भय के माहौल में अहिंसा का हथियार जीत गया था।
मोदी की सत्ता के चार साल जनता मूक दर्शक बनी रही और पांचवे साल भी उसकी आवाज नहीं सुनी जा रही हैं। हर एक मामले को जनता की नाकामी दिखाकर केंद्र सरकार पल्ला झाड़ती नजर आ रही हैं। फिर चाहे लोगों को मन माफिक रोजगार देना हो या महंगाई पर लगाम लगाना। किसानों का मुद्दा हो या युवाओं को बेहतर भविष्य का आस्वासन।
अगर ऐसा ही चलता रहा और मोदी केवल विदेश भ्रमण करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब केंद्र की सत्ता जनता द्वारा परिवर्तित कर दी जाऐगी।
:संपादकीय
इस महान जनता ने ही सदियों के अत्याचारों को सहते हुए आधुनिक भारत का निर्माण किया हैं। अक्सर इस जनता को सत्ता का साथ न के बराबर मिलता आया हैं फिर चाहे वो राजतंत्र हो या लोकतंत्र।
आज वर्तमान सरकार का ट्रेक रिकॉर्ड तो इतना ख़राब हैं कि उसने अपने चार साल केवल जनता को दिग्भ्रमित करने में बिता दिए। पांचवा साल भी इस से इतर कुछ और नहीं बीत रहा हैं। तो आज के परिपेक्ष में इस सरकार को कितने नंबर दिए जाए, ये जनता खूब अच्छे से जानती हैं। विपक्ष एक बार फिर से केंद्र की सत्ता पर हावी होता जा रहा हैं और नित नए गठजोड़ सामने आ रहे हैं।
जनता जब एक बार मन बना लेती हैं तो अच्छे-अच्छे तानाशाह को उखाड़ फेकती हैं फिर माध्यम चाहे अहिंसा ही क्यों न हो, ऐसा ही कुछ अंग्रेजी हुकूमत के साथ भी हुआ था जिसको जनता ने संगठित होकर केवल अहिंसा के रास्ते से उख़ाड़ फेका था। भय के माहौल में अहिंसा का हथियार जीत गया था।
मोदी की सत्ता के चार साल जनता मूक दर्शक बनी रही और पांचवे साल भी उसकी आवाज नहीं सुनी जा रही हैं। हर एक मामले को जनता की नाकामी दिखाकर केंद्र सरकार पल्ला झाड़ती नजर आ रही हैं। फिर चाहे लोगों को मन माफिक रोजगार देना हो या महंगाई पर लगाम लगाना। किसानों का मुद्दा हो या युवाओं को बेहतर भविष्य का आस्वासन।
अगर ऐसा ही चलता रहा और मोदी केवल विदेश भ्रमण करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब केंद्र की सत्ता जनता द्वारा परिवर्तित कर दी जाऐगी।
:संपादकीय
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