गम की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नहीं,
तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं।
नींद का हल्का गुलाबी सा खुमार आँखों में था,
यूँ लगा जैसे वो शब को देर तक सोया नहीं।
हर तरफ दीवार-ओ-दर और उन में आँखों के हुजूम,
कह सके जो दिल की हालत वो लब-ए-गोया नहीं।
जुर्म आदम ने किया और नस्ल-ए-आदम को सजा,
काटता हूँ जिंदगी भर मैं ने जो बोया नहीं।
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी 'मुनीर',
गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं।
■ मुनीर नियाजी
तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं।
नींद का हल्का गुलाबी सा खुमार आँखों में था,
यूँ लगा जैसे वो शब को देर तक सोया नहीं।
हर तरफ दीवार-ओ-दर और उन में आँखों के हुजूम,
कह सके जो दिल की हालत वो लब-ए-गोया नहीं।
जुर्म आदम ने किया और नस्ल-ए-आदम को सजा,
काटता हूँ जिंदगी भर मैं ने जो बोया नहीं।
जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी 'मुनीर',
गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं।
■ मुनीर नियाजी



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