तत्कालीन प्रधानमंत्री कोई आम व्यक्ति नहीं हैं वरण उन्होंने शांति की तलाश में घर छोड़ कर साधना की हैं। एक ऐसा इंसान जिसने जीवन में कठिनाइयों का डटकर सामना किया हों उसका प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना वाकई हर्ष का विषय हैं। पर कहते हैं लोगों का असली चेहरा तब नजर आता हैं जब वो अपनी सफलता के उच्चतम बिंदु पर होते हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही मोदी रातो रात बदल गए...
भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म करेंगे
मोदी जी ने 2014 के लोकसभा के चुनावों में प्रचार के समय ऐसा दिखाया कि देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रस्टाचार को जड़ से ख़त्म करेंगे। पर आज जब केंद्र सरकार अपने पांचवे साल का कार्यकाल पूरा कर रही हैं और 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रही है, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना तो दूर लोगों का कहना हैं कि मोदी जी ने उसे और बढ़ाया ही हैं। अब भ्रष्टाचार परदे के पीछे न रहकर सबकी आँखों के सामने होने वाली सच्चाई बनती जा रही हैं। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भ्रष्टाचार से पीड़ित 180 देशों में भारत 81 वें स्थान पर है। इससे तो ऐसा ही लगता है कि सिर्फ अमली तौर पर भ्रष्टाचार खत्म हो गया है। विशेषज्ञों की माने तो,भ्रष्टाचार के खिलाफ बने कानूनों को कमजोर कर दिया गया हैं और अपराधी को आसानी से अपराध कर देश छोड़ने की खुली छूट दी जा चुकी हैं।
ये मोदी का लागू किया अघोषित आपातकाल ही है कि जिसने जनता को इस भ्रस्टाचार के खिलाफ संगठित होने से रोक रखा हैं।
हर मामले में सुरक्षा बलों का खुलकर प्रयोग व आम जनता पर दोषारोपण
आज केंद्र सरकार हर एक आम नागरिक को संदेह की दृष्टि से देख रही हैं। गाहे-बगाहे सुरक्षा बलों का बल प्रयोग भी सामने आता रहता हैं। तो ऐसे में आप की स्वतंत्रता पे एक अघोषित प्रश्नचिह्न लग जाता हैं। ये प्रश्नचिह्न किसी और ने नहीं वरण आप की चुनी सरकार ने आप के ऊपर लगाया हैं। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का हक़ हैं पर मोदी सरकार ने तो मीडिया तक को अपराधी साबित कर पाबन्दी लगा रखी थी। अब जब चुनावी वर्ष सामने आया हैं तो कुछ दुश्वारियां कम हुई हैं। आगे भगवान् मालिक हैं कि लोगों की निजी स्वतंत्रता वर्त्तमान सरकार में कितने दिनों तक सुरक्षित रहती हैं।
लोगों को शिक्षा से महरूम रखना
वर्तमान केंद्र सरकार के कोप का भाजन सबसे पहले देश के विश्वविद्यालय बने। ऐसा कोई दिन नहीं बीता जिसमे देश के युवाओं ने मोदी सरकार के खिलाफ आवाज न उठाई हो। तो मोदी सरकार ने भी हर विश्वविद्यालय में शारीरिक बल का खुलकर प्रयोग किया। इस बल प्रयोग में छात्राओं को भी नहीं बख्शा गया। देश की शिक्षा व्यवस्था का जितना बुरा हाल आज हैं उतना शायद कभी नहीं रहा। आज हाल ये हो गया की बेरोजगारी की मार झेल रहे छात्रों में आत्महत्या की प्रवित्ति बढ़ रही हैं।
खतरे में लोक, अमीरों के हाथ में 'तंत्र'
जानकारों की माने तो पूंजीपतियों ने पूरे देश को ही गुलाम बनाना शुरू कर दिया हैं। और इस सब के बीच खड़ा हैं देश में मौजूद अघोषित आपातकाल जिसमे वो हर कुछ हो रहा हैं जो जनता के हक़ और लोकतंत्र को दिनों दिन खाए जा रहा हैं। ये अघोषित आपातकाल ही था कि मोदी ने रातो रात देश की जनता के पैसो को बैंको में जमा करवा लिया, ये अघोषित आपातकाल ही था कि मोदी ने सबको 15 लाख का वादा कर मुकर गए और मिडिया और जनता उफ़ तक नहीं कर सकी, ये अघोषित आपातकाल ही था कि देश की सीमा पर जवानों की मौत लगातार होती रही और मोदी विदेश दौरे में नवाज शरीफ से मिल आए। ये अघोषित आपातकाल ही हैं कि आम जनता बेरोजगारी और महंगाई से मर रही हैं और सरकार के कानों में जू तक नहीं रेंग रही हैं।
◼️काशी पत्रिका
भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म करेंगे
मोदी जी ने 2014 के लोकसभा के चुनावों में प्रचार के समय ऐसा दिखाया कि देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रस्टाचार को जड़ से ख़त्म करेंगे। पर आज जब केंद्र सरकार अपने पांचवे साल का कार्यकाल पूरा कर रही हैं और 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रही है, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना तो दूर लोगों का कहना हैं कि मोदी जी ने उसे और बढ़ाया ही हैं। अब भ्रष्टाचार परदे के पीछे न रहकर सबकी आँखों के सामने होने वाली सच्चाई बनती जा रही हैं। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भ्रष्टाचार से पीड़ित 180 देशों में भारत 81 वें स्थान पर है। इससे तो ऐसा ही लगता है कि सिर्फ अमली तौर पर भ्रष्टाचार खत्म हो गया है। विशेषज्ञों की माने तो,भ्रष्टाचार के खिलाफ बने कानूनों को कमजोर कर दिया गया हैं और अपराधी को आसानी से अपराध कर देश छोड़ने की खुली छूट दी जा चुकी हैं।
ये मोदी का लागू किया अघोषित आपातकाल ही है कि जिसने जनता को इस भ्रस्टाचार के खिलाफ संगठित होने से रोक रखा हैं।
हर मामले में सुरक्षा बलों का खुलकर प्रयोग व आम जनता पर दोषारोपण
आज केंद्र सरकार हर एक आम नागरिक को संदेह की दृष्टि से देख रही हैं। गाहे-बगाहे सुरक्षा बलों का बल प्रयोग भी सामने आता रहता हैं। तो ऐसे में आप की स्वतंत्रता पे एक अघोषित प्रश्नचिह्न लग जाता हैं। ये प्रश्नचिह्न किसी और ने नहीं वरण आप की चुनी सरकार ने आप के ऊपर लगाया हैं। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का हक़ हैं पर मोदी सरकार ने तो मीडिया तक को अपराधी साबित कर पाबन्दी लगा रखी थी। अब जब चुनावी वर्ष सामने आया हैं तो कुछ दुश्वारियां कम हुई हैं। आगे भगवान् मालिक हैं कि लोगों की निजी स्वतंत्रता वर्त्तमान सरकार में कितने दिनों तक सुरक्षित रहती हैं।
लोगों को शिक्षा से महरूम रखना
वर्तमान केंद्र सरकार के कोप का भाजन सबसे पहले देश के विश्वविद्यालय बने। ऐसा कोई दिन नहीं बीता जिसमे देश के युवाओं ने मोदी सरकार के खिलाफ आवाज न उठाई हो। तो मोदी सरकार ने भी हर विश्वविद्यालय में शारीरिक बल का खुलकर प्रयोग किया। इस बल प्रयोग में छात्राओं को भी नहीं बख्शा गया। देश की शिक्षा व्यवस्था का जितना बुरा हाल आज हैं उतना शायद कभी नहीं रहा। आज हाल ये हो गया की बेरोजगारी की मार झेल रहे छात्रों में आत्महत्या की प्रवित्ति बढ़ रही हैं।
खतरे में लोक, अमीरों के हाथ में 'तंत्र'
जानकारों की माने तो पूंजीपतियों ने पूरे देश को ही गुलाम बनाना शुरू कर दिया हैं। और इस सब के बीच खड़ा हैं देश में मौजूद अघोषित आपातकाल जिसमे वो हर कुछ हो रहा हैं जो जनता के हक़ और लोकतंत्र को दिनों दिन खाए जा रहा हैं। ये अघोषित आपातकाल ही था कि मोदी ने रातो रात देश की जनता के पैसो को बैंको में जमा करवा लिया, ये अघोषित आपातकाल ही था कि मोदी ने सबको 15 लाख का वादा कर मुकर गए और मिडिया और जनता उफ़ तक नहीं कर सकी, ये अघोषित आपातकाल ही था कि देश की सीमा पर जवानों की मौत लगातार होती रही और मोदी विदेश दौरे में नवाज शरीफ से मिल आए। ये अघोषित आपातकाल ही हैं कि आम जनता बेरोजगारी और महंगाई से मर रही हैं और सरकार के कानों में जू तक नहीं रेंग रही हैं।
◼️काशी पत्रिका



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