शिक्षित माता पिता के बच्चे ज्यादा धैर्यवान होते हैं
हालिया साइंस मैग्जीन में छपी रिपोर्ट को अगर सच माने तो पढ़े लिखे माता-पिता के बच्चे कम पढ़े लिखे माता-पिता के बच्चों से ज्यादा धैर्यवान होते हैं। हालिया रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि शिक्षा के बढ़ते स्तर के कारण आज के बच्चे पहले के बच्चों से ज्यादा धैर्यवान होते हैं। मनोवैज्ञानिकों ने बच्चों पे मार्समैलो टेस्ट के जरिये ये आकड़ा पाया हैं। 1960 में बच्चे जहाँ अतरिक्त वस्तु के लिए 5 मीनट इंतजार करते थे वही ये आकड़ा 1980 में 6 मीनट हो गया। सन 2000 में बच्चों के इंतजार करने का समय एक मीनट और बढ़ कर 7 मीनट हो गया।
1960 में जहाँ 30 % बच्चे ही अतरिक्त वास्तु के लिए 5 मीनट इंतजार कर पाते थे वहीँ 1980 और 2000 में इनका प्रतिशत 40 और 60 प्रतिशत हो गया। हालाकि वैज्ञानिक खुल कर इस बात की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं क्योकि गरीब बच्चों के आकड़े इससे ठीक उलटे हैं।
आपके बदलते व्यवहार का कारण हार्मोन्स हो सकते हैं
1848 में पहली बार वैज्ञानिकों ने ह्यूमन हार्मोन्स पर काम करना शुरू किया। परिणाम इतने क्रांतिकारी थे कि वैज्ञानिकों ने मान लिया मनुष्य की अतिरेय समस्याओं का समाधान हार्मोन्स को बढ़ा घटा के किया जा सकता हैं। हार्मोन्स एक प्रकार के कैमिकल मैसेंजर होते है जो मनुष्य के विकास, सोना, व्यवहार सभी के लिए जिम्मेदार होते हैं।
एक समय ऐसा भी आया जब यूजेन स्टेनाच ने मानव को फिर से जवान करने के लिए इन हार्मोन्स का इस्तेमाल किया। हालिया वैज्ञानिकों ने एक नए हार्मोन का पता लगाया हैं जिसका नाम हैं ऑक्सीटोसिन। माना जाता हैं ऑक्सीटोसिन ही वो हार्मोन हैं जो बच्चे और माँ के सम्बन्ध को स्थापित करता हैं। विश्वास से जुड़े इस हार्मोन को मोरल मॉलिक्यूल भी कहाँ जाता हैं।

कॉफी आप के दिल के लिए बेहतर हैं
कॉफी में पाए जाने वाले कौफीन में प्रोटीन p27 पाया जाता हैं जो आपके एनर्जी सेल को बढ़ता हैं और हार्ट डैमेज को जल्द ठीक करने में मदत करता हैं। कॉफी में पाए जाने वाले तत्वों में कुछ तत्व ऐसे भी होते हैं जो डायबटीज़ को भी कंट्रोल में रखते हैं।
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हालिया साइंस मैग्जीन में छपी रिपोर्ट को अगर सच माने तो पढ़े लिखे माता-पिता के बच्चे कम पढ़े लिखे माता-पिता के बच्चों से ज्यादा धैर्यवान होते हैं। हालिया रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि शिक्षा के बढ़ते स्तर के कारण आज के बच्चे पहले के बच्चों से ज्यादा धैर्यवान होते हैं। मनोवैज्ञानिकों ने बच्चों पे मार्समैलो टेस्ट के जरिये ये आकड़ा पाया हैं। 1960 में बच्चे जहाँ अतरिक्त वस्तु के लिए 5 मीनट इंतजार करते थे वही ये आकड़ा 1980 में 6 मीनट हो गया। सन 2000 में बच्चों के इंतजार करने का समय एक मीनट और बढ़ कर 7 मीनट हो गया।
1960 में जहाँ 30 % बच्चे ही अतरिक्त वास्तु के लिए 5 मीनट इंतजार कर पाते थे वहीँ 1980 और 2000 में इनका प्रतिशत 40 और 60 प्रतिशत हो गया। हालाकि वैज्ञानिक खुल कर इस बात की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं क्योकि गरीब बच्चों के आकड़े इससे ठीक उलटे हैं।
आपके बदलते व्यवहार का कारण हार्मोन्स हो सकते हैं
1848 में पहली बार वैज्ञानिकों ने ह्यूमन हार्मोन्स पर काम करना शुरू किया। परिणाम इतने क्रांतिकारी थे कि वैज्ञानिकों ने मान लिया मनुष्य की अतिरेय समस्याओं का समाधान हार्मोन्स को बढ़ा घटा के किया जा सकता हैं। हार्मोन्स एक प्रकार के कैमिकल मैसेंजर होते है जो मनुष्य के विकास, सोना, व्यवहार सभी के लिए जिम्मेदार होते हैं।
एक समय ऐसा भी आया जब यूजेन स्टेनाच ने मानव को फिर से जवान करने के लिए इन हार्मोन्स का इस्तेमाल किया। हालिया वैज्ञानिकों ने एक नए हार्मोन का पता लगाया हैं जिसका नाम हैं ऑक्सीटोसिन। माना जाता हैं ऑक्सीटोसिन ही वो हार्मोन हैं जो बच्चे और माँ के सम्बन्ध को स्थापित करता हैं। विश्वास से जुड़े इस हार्मोन को मोरल मॉलिक्यूल भी कहाँ जाता हैं।

कॉफी आप के दिल के लिए बेहतर हैं
कॉफी में पाए जाने वाले कौफीन में प्रोटीन p27 पाया जाता हैं जो आपके एनर्जी सेल को बढ़ता हैं और हार्ट डैमेज को जल्द ठीक करने में मदत करता हैं। कॉफी में पाए जाने वाले तत्वों में कुछ तत्व ऐसे भी होते हैं जो डायबटीज़ को भी कंट्रोल में रखते हैं।
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