राजनीतिक दृष्टि से देखिये तो, देश धर्म,जाति, क्षेत्र, कुनबा...जाने कितने टुकड़ों में बंटा है, जहां कोई एक-दूसरे की मुसीबत-दर्द न समझता है और न समझना चाहता है। किंतु इससे इतर हकीकत में आज भी हिंदुस्तान के सीने में, “मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना...हिन्दुस्तान हमारा” गीत जिंदा है। वक्त-बेवक्त इसके उदाहरण सामने आते रहते हैं। ताजा घटना देश के दो अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिली। पहला मामला इलाहाबाद का है, जहां कुंभ मेले की तैयारियों के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण के लिए मुसलमानों ने मंगलवार को कई मस्जिदों की दीवारें स्वयं गिरा दी। दूसरा मामला महाराष्ट्र के नासिक का है, जहां एक मुस्लिम युवक ने अपनी जान पर खेलकर पांच हिंदुओं की जान भीड़ से बचाई।
जनवरी 2019 में संगम नगरी में आयोजित होने जा रहे कुंभ मेले के मद्देनजर शहर की सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है, चूंकि शहर का पुराना हिस्सा घनी आबादी वाला है, यहां चौड़ीकरण में मुश्किल पेश आ रही थी। समस्या यह भी थी कि चौड़ीकरण के रस्ते में कई मस्जिदें थी। हिंदू-मुस्लिम एकता का परिचय देते हुए यहां के मुस्लिम बाशिंदों ने कई मस्जिदों की दीवार खुद ही गिरा दिया। वहीँ, महाराष्ट्र के मालेगांव में बच्चा चोर होने के शक में पांच लोगों को भीड़ ने घेर लिया था। तभी, वसीम नामक युवक बीच में आ गया और अपनी जान की परवाह किए बिना उसने इस हिंदू परिवार की रक्षा की।
दोनों घटनाओं ऐसे समय में सामने आईं हैं, जब लोकसभा चुनाव करीब है और सियासत के नाम पर देश को हिंदू-मुस्लिम, जात-पात, क्षेत्र-भाषा के नाम पर बांटा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे पोस्ट की भरमार है। ऐसे में, ये घटनाएं मिसाल हैं कि मानवता किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं होता।
कुल मिलाकर, देशभर से एकता-अखंडता के ऐसे उदाहरण सामने आएं, तो बांटने की सियासत बंद हो जाएगी। लोकतंत्र में नेता सही अर्थों में जनता के सेवक होंगे, जो उनके हित के लिए काम करेंगे और देश सचमुच ‛सारे जहां से अच्छा हो जाएगा’।
■ संपादकीय
जनवरी 2019 में संगम नगरी में आयोजित होने जा रहे कुंभ मेले के मद्देनजर शहर की सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है, चूंकि शहर का पुराना हिस्सा घनी आबादी वाला है, यहां चौड़ीकरण में मुश्किल पेश आ रही थी। समस्या यह भी थी कि चौड़ीकरण के रस्ते में कई मस्जिदें थी। हिंदू-मुस्लिम एकता का परिचय देते हुए यहां के मुस्लिम बाशिंदों ने कई मस्जिदों की दीवार खुद ही गिरा दिया। वहीँ, महाराष्ट्र के मालेगांव में बच्चा चोर होने के शक में पांच लोगों को भीड़ ने घेर लिया था। तभी, वसीम नामक युवक बीच में आ गया और अपनी जान की परवाह किए बिना उसने इस हिंदू परिवार की रक्षा की।
दोनों घटनाओं ऐसे समय में सामने आईं हैं, जब लोकसभा चुनाव करीब है और सियासत के नाम पर देश को हिंदू-मुस्लिम, जात-पात, क्षेत्र-भाषा के नाम पर बांटा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे पोस्ट की भरमार है। ऐसे में, ये घटनाएं मिसाल हैं कि मानवता किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं होता।
कुल मिलाकर, देशभर से एकता-अखंडता के ऐसे उदाहरण सामने आएं, तो बांटने की सियासत बंद हो जाएगी। लोकतंत्र में नेता सही अर्थों में जनता के सेवक होंगे, जो उनके हित के लिए काम करेंगे और देश सचमुच ‛सारे जहां से अच्छा हो जाएगा’।
■ संपादकीय
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