हालिया आए विभिन्न राज्यों और सीबीएसई के १० वीं और १२ वीं के परीक्षा परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया हैं कि लड़कियां लड़कों से किसी मामले में पीछे नहीं हैं। फिर चाहे वो शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर व्यापार, सेना या विदेशी मामलों की जानकारी। कुछ दिनों पहले ही भारतीय नेवी की छः सदस्सीय टीम ने आईएनएसवी तरणि से पूरे विश्व का चक्कर लगाया था। ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार हुआ जब किसी दल ने पूरे विश्व का चक्कर किसी शिप के साथ लगाया हो। इस अभियान की मुख्य ऑफिसर भी एक महिला ही थी। महिलाओं की बड़ी संख्या में आगे आने वाली पीढ़ी अपने पहले की पीढ़ी से प्रेरणा लेकर हर क्षेत्र में सफलता के झण्डे गाड़ रहीं हैं।
आज देश की रक्षा और विदेश मंत्री महिलाएं हैं। और इनसे प्रेरणा लेने वाली महिलाओं की कमी नहीं हैं। आज महिलाओं ने अपने समूह निर्माण कर व्यापार के क्षेत्र में नई उचाईयों को छुआ हैं। इन्ही समूहों ने कुछ दिनों पहले शराब और नशाखोरी के खिलाफ अभियान छेड़ा था जिसका परिणाम था कि मुख्य राजमार्गों से २०० मीटर के अंदर शराब की दुकाने बंद करवा दी गई।
बिहार में महिला समूहों के क्रियाकलापों की वजह से ही पूर्ण शराब बंदी लागू हो सकी। मुस्लिम महिलाओं ने बड़े पैमाने पर तीन तलाक के खिलाफ अभियान चलाया। जो बहुत हद तक सफल रहा। गाहे बगाहे वो पर्दा प्रथा के खिलाफ भी अभियान चालती ही रहती हैं। अगर आप को याद होगा तो २०१४ के पहले भी महिलाओं के रेप के खिलाफ क़ानूनी जंग की वजह से ही केंद्र की सत्ता परिवर्तित हुई थी।
आज देश की आधी आबादी अपना हक़ मांग नहीं रही बल्कि तमाम मुश्किलों से जूझ कर खुद ही आगे आ रही हैं। देश में हो रहें अमूल-चूल परिवर्तनों की अगुआ बनी महिलाएं आज स्वयं में इतनी समर्थवान हो चुकीं है कि उन्हें सरकारी वादों और राजनीतिक गलियारों में शिष्टाचार वश नेताओं के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं हैं।
आज देश की रक्षा और विदेश मंत्री महिलाएं हैं। और इनसे प्रेरणा लेने वाली महिलाओं की कमी नहीं हैं। आज महिलाओं ने अपने समूह निर्माण कर व्यापार के क्षेत्र में नई उचाईयों को छुआ हैं। इन्ही समूहों ने कुछ दिनों पहले शराब और नशाखोरी के खिलाफ अभियान छेड़ा था जिसका परिणाम था कि मुख्य राजमार्गों से २०० मीटर के अंदर शराब की दुकाने बंद करवा दी गई।
बिहार में महिला समूहों के क्रियाकलापों की वजह से ही पूर्ण शराब बंदी लागू हो सकी। मुस्लिम महिलाओं ने बड़े पैमाने पर तीन तलाक के खिलाफ अभियान चलाया। जो बहुत हद तक सफल रहा। गाहे बगाहे वो पर्दा प्रथा के खिलाफ भी अभियान चालती ही रहती हैं। अगर आप को याद होगा तो २०१४ के पहले भी महिलाओं के रेप के खिलाफ क़ानूनी जंग की वजह से ही केंद्र की सत्ता परिवर्तित हुई थी।
आज देश की आधी आबादी अपना हक़ मांग नहीं रही बल्कि तमाम मुश्किलों से जूझ कर खुद ही आगे आ रही हैं। देश में हो रहें अमूल-चूल परिवर्तनों की अगुआ बनी महिलाएं आज स्वयं में इतनी समर्थवान हो चुकीं है कि उन्हें सरकारी वादों और राजनीतिक गलियारों में शिष्टाचार वश नेताओं के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं हैं।


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