सिनेमा-थियेटर के सरताज 'पृथ्वीराज' - Kashi Patrika

सिनेमा-थियेटर के सरताज 'पृथ्वीराज'

पुण्यतिथि विशेष: पृथ्वीराज कपूर हिन्दी सिनेमा के सबसे पुराने नामों में से एक हैं. 1972 में आज ही के दिन अपने इस कीमती हीरे को कला जगत ने खो दिया था।।

फिल्म 'मुग्ल-ए-आजम' के शहंशाह अकबर हों या 'आवारा' के जस्टिस रघुनाथ, 'मंजिल' का सुरेश या फिर कोई और किरदार, हर पात्र को निभाते समय खुद उसी रूप में सहजता से ढल जाना पृथ्वीराज कपूर को बखूबी आता था. कपूर परिवार से सिनेमा में सबसे पहला कदम रखने वाले पृथ्वीराज कपूर फिल्मों और नाटकों की दुनिया में काम करने वाली भारत की कुछ प्रारंभिक और मशहूर हस्तियों में से एक थे. शुरुआत में कुछ मूक फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने पहली आवाज वाली भारतीय फिल्म 'आलम आरा' में भी काम किया.
उनके द्वारा 1942 में शुरू किया गया “पृथ्वी थियेटर” आज भी कला प्रेमियों के लिए एक अहम स्थान रखता है. 1942 में ही उनके थिएटर समूह ने 'शकुंतला' और 'कालीदास' जैसे नाटक कर अपना लोहा मनवा लिया था. उस समय पृथ्वी समूह भारत भर में जगह-जगह जाकर अपने नाटक प्रस्तुत किया करता था. 16 सालों तक उनके नाटक समूह ने करीब 2,662 नाटक किए, जिनमें से हर एक में पृथ्वीराज में मुख्य पात्र निभाया. यूं तो पृथ्वीराज ने अनेक फिल्मों में काम किया लेकिन ‘आवारा’ (51) में जज रघुनाथ और ‘मुगल-ए-आज़म’ (60) में शहंशाह अकबर की भूमिका में वे अपने सर्वोच्च
स्थान पर दिखाई देते हैं.पृथ्वीराज कपूर को अपने जीवनकाल में ही उनकी इस कला साधना के लिए दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड जैसे कई सम्मान भी मिले. 50 के दशक में उन्हें राज्य सभा का सदस्य भी मनोनीत किया गया.

29 मई 1972 को एक लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ. दुनिया छोड़कर जाने से पहले वे फिल्म जगत के लिए राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, करिश्मा कपूर, करीना कपूर और रणबीर कपूर जैसे कलाकारों का एक ऐसा परिवार छोड़ गए हैं जो आज भी उनकी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं.
(साभार)

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