'आपकी- गृहस्थी' - गृहस्थी के काम बाँट कर ही किये जाते है... - Kashi Patrika

'आपकी- गृहस्थी' - गृहस्थी के काम बाँट कर ही किये जाते है...

घर में काम का जो रुटीन होता है वही काम को बोझिल बना देता है। हर काम ही समय से ख़त्म करना गृहणी की मज़बूरी होती है और इस पर ही घर एक व्यवस्थित घर कहा जाता है।  अब व्यवस्थित घर किसको पसंद नहीं आएगा।  
खाना समय पर , धुले कपडे , इस्त्री किये गए , क़रीने से तह कर के अपने-अपने स्थान पर रखे मिलने पर हम मिंटो में तैयार हो जाते है।  चाहे बच्चे स्कूल जाने की तैयारी में हो , चाहे पति ऑफिस के लिए रेडी हो रहे हों।


घर के इन्ही छोटे -छोटे कामों को करते-करते गरिमा का दिन बीत जाया करता। वह रसोई-घर से बालकनी में सूखे कपडे समेटते, तह करते, रखते अपने जीवन को कोसती भी रहती।  तभी उसकी बड़ी बहन उससे मिलने अयीं।  छोटी बहन के मन की बात सुन कर उन्हें समस्या का समाधान समझ आगया।छोटी बहन से बोलीं, ' तुम सारा काम ख़ुद ही करना चाहती हो, बिल्कुल अपने ढंग से । काम को बाँटती क्यूँ नहीं। जब तक तुम सबकी ज़िम्मेदारी लेती रहोगी, सब उस काम को तुम्हारे भरोसे ही तो छोड़ देंगे। बच्चों में भी काम को बाँट दो। पति को भी उनके कुच्छ छोटे-छोटे काम की ज़िमेदारी दे दो। पहले पहल कुच्छ दिक्कत आएगी पर फ़िर सबको इनकी आदत हो जाएगी। तुम घर का सर्वर नहीं के स्विच ऑन ही रहे। ख़ुद को ज़िम्मेदारी से मुक्त करो के लोग ज़िम्मेदार बने। 

बहन ने धीरे-धीरे बच्चों को उनके काम सौंप दिए। इससे ही अब उसके पास कुच्छ अपने लिए वक़्त मिलने लगा। पति भी बहुत से अपने काम अब स्वमं ही करने लगे।।

गृहस्थी के काम मिल-जुल कर ही किये जाते है। काम को सबके हाथ में थोड़ा-थोड़ा रख दीजिए। आपको थोड़ा आराम मिलेगा। 
अदिति 

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