
वैज्ञानिक पत्रिका लांसेट में विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों की एक स्टडी प्रकाशित हुई है जिसमें यह रहस्योद्घाटन किया गया है। इसके अनुसार दुनिया भर में ४० फीसदी बच्चे, ३५ फीसदी महिलाएं और ३३ फीसदी मर्द बिन चाहे सिगरेट का धुंआ पी रहे हैं.
पैसिव स्मोकिंग के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार पौने चार लाख लोग दिल की बीमारियों के कारण मरते हैं तो डेढ़ लाख से अधिक लोग सांस की बीमारी के कारण। इसके अलावा ३७ हजार लोग अस्थमा से और साढ़े २१ हजार फेफड़े के कैंसर से मरते हैं।
स्टडी के लेखकों का कहना है कि बच्चे मुख्य रूप से अपने घर पर पैसिव स्मोकिंग का शिकार होते हैं अगर घर में कोई सिगरेट पीता हो तो वे इस खतरे से बच नहीं सकते। खासकर गरीब देशों में धूम्रपान और संक्रमण मौत की घातक जोड़ी हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों का कहना है कि भवनों और दफ्तरों में धूम्रपान पर रोक लगाने वाले कानून दिल की बीमारी और मौत के खतरे को कम कर सकते हैं। इससे चिकित्सा के क्षेत्र में खर्च भी कम होगा।
जिन देशों में धूम्रपान विरोधी कानून लागू किया जा चुका है वहां दुनिया की आबादी का सिर्फ साढ़े सात प्रतिशत हिस्सा रहता है.
चीन में हैं दुनिया के सबसे ज्यादा स्मोकर्स/ इंडोनेशिया में 76% पुरुष करते हैं धूम्रपान
- दुनिया में धूम्रपान करने वालों की सबसे ज्यादा संख्या चीन में है। चीन की 1.3 अरब की आबादी में करीब 31 करोड़ 50 लाख लोग आदतन सिगरेट पीते हैं। दुनियाभर में बनने वाली एक तिहाई सिगरेट की खपत भी चीन में ही होती है।
- इंडोनेशिया की आबादी में 15 साल के ऊपर के 76 फीसदी पुरुष स्मोकिंग करते हैं। ये जनसंख्या के अनुपात के लिहाज से सबसे ज्यादा है।
- दुनियाभर में स्मोकर्स की 80 फीसदी आबादी निचले और मध्यम वर्गीय देशों में रहती है। स्मोकिंग करने वाले 22 करोड़ लोग गरीब हैं।


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