बेबाक हस्तक्षेप - Kashi Patrika

बेबाक हस्तक्षेप

समय बीतने के साथ प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता में धीरे-धीरे हास होता जा रहा हैं लोकतंत्र की यही सब से बड़ी खूबसूरती हैं कि इसमें बैठा हर शख्श प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच सकता हैं और समय आने पर जनता उसे सही रास्ता भी दिखाती हैं।

२०१४ के लोकसभा चुनावों में मोदी की जो लहर थी वो अब जुमलों में धूमिल होती नजर आ रही हैं। एक के बाद एक किये वायदे और उन को अमली जामा न पहना सकने के कारण मोदी के लिए आज स्थिति काफी बदल चुकी हैं। एक समय ऐसा आया की सत्ता का एक मात्र केंद्र प्रधानमंत्री मोदी बनकर रह गए। कोई भी निर्णय वही से शुरू होकर वही पर ख़तम हो जाया करता था।

लोगों की आम धारणा तो यही बयां करती हैं एक और जहाँ मोदी अपनी उपलब्धियों को आम जनता को दी गई सौगातों के रूप में गिनवाते हैं तो दूसरी और जनता सवाल करती हैं कि  राम मंदिर का क्या हुआ, हर हाथ रोजगार के वादे का क्या हुआ, शिक्षा की गुणवत्ता का क्या हुआ, बेरोजगारों का क्या हुआ, विदेशों में जमा काले धन का क्या हुआ।

हालिया हुए गुजरात और कर्नाटक के चुनावों को अगर गौर से देखा जाए तो लगता तो यही हैं कि  मोदी मैजिक अपने ढलान पर हैं। गुजरात में जहाँ एक ओर कांग्रेस ने बीजेपी को अच्छी टक्कर दी वहीँ कर्नाटक में सरकार बनाने में सफल भी हो गई। ये मोदी की घटती लोकप्रियता का ही पैमाना है जहाँ हर चुनाव में मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में उतरते हैं।

अब केंद्र के चुनावों के पहले कई राज्यों में चुनाव होना हैं जहाँ मोदी का असली इम्तेहान सामने आएगा। यहाँ मध्यप्रदेश का चुनाव रोचक होगा जहाँ के क्षत्रप शिवराज सिंह चौहान हैं। माना जाता हैं यहाँ उनकी स्थिति सदैव से मजबूत रही हैं अगर यहाँ पर वो फिर से जीत जातें है तो मोदी सरकार को केंद्र में फिर से संजीवनी देने का कार्य करेंगे।

-संपादकीय 

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