विज्ञापन और ताबड़तोड़ रैलियों के माध्यम से केंद्र पर काबिज होने वाली मोदी सरकार ने बदस्तूर विज्ञापनों को आगे भी जारी रखने का फैसला किया हैं। हालिया उप चुनावों में मिली करारी हार ने बीजेपी को फिर से विज्ञापन करने को मजबूर कर दिया हैं। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने 1 लाख लोगों से मिलने का लक्ष्य रखा हैं और सभी को मोदी सरकार की उपलब्धियों को व्यक्तिगत रूप से बताने के मिशन पर कार्य शुरू कर दिया हैं।
हम आप को बताते चले की इस में आप का नंबर नहीं आने वाला क्योकि सरकार ने सीधे जनता से संवाद करने के स्थान पर विशिष्ठ लोगों से मिलना ज्यादा बेहतर समझा हैं।
आकड़ों की माने तो मोदी सरकार ने बीते 4 सालों में सरकार के विज्ञापनों पर 4,343.26 करोड़ रूपए खर्च किए हैं। ये सारा पैसा भारत के टैक्स पेयर का हैं ये आकड़े केंद्र सरकार के हैं इसमें राज्य सरकारों के खर्चे का हिसाब-किताब नहीं हैं।



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