सरकार पिछले ४ सालों से नई शिक्षा नीति का हवाला देकर शिक्षा से जुड़े सभी मामलों को दबाए हुए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंत्री स्मृति ईरानी को एक बार बदला भी जा चूका हैं पर फिर भी नतीजा सिफर ही हैं।
आखिर नई शिक्षा नीति क्या होगी? ये सभी के लिए उत्सुकता का विषय बना रहे इसके लिए सरकार ने जरूर पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। सरकार ने प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक एवं पद्मविभूषण डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया है जो अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं प्रस्तुत कर पाई हैं।
समय समय पर विपक्ष के द्वारा ज्यादा हो हल्ला होने पर सरकार कोई न कोई नया पैतरा ढूंढ ही लेती हैं। आप को बता दे कि सरकार ने बिहार चुनावों के ठीक पहले ही शोध छात्रों और विशेष योग्यता रखने वाले लोगों की एक संस्था बनाने का आश्वासन दिया था।
चुनाव बीता और योजना भी समय के साथ सरकारी फाइलों में धूल खाने को छोड़ दी गई।
अब जैसे जैसे २०१९ के चुनाव का समय निकट आ रहा हैं सरकार की बेचैनी बढ़ती जा रही हैं।आज ही सरकार ने एक विज्ञापन जारी किया हैं उसमे सीधी भर्ती के माध्यम से प्राईवेट लोगों को सरकार में भागीदारी का मौका दिया हैं।
कुछ लोगों का मानना हैं कि आप इसे सरकार के द्वारा अंतिम वर्ष में लोगों को रेवड़ी बाटना भी कह सकते हैं। तो अपने अंतिम वर्ष में तत्कालीन सरकार से अब लोगों को ज्यादा उम्मीद भी नहीं बची हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट इस प्रकार का हो सकता हैं -
1-आंगनबाड़ी को प्री-प्राइमरी स्कूल में बदला जायेगा। राज्य एक साल के भीतर कोर्स बनायेंगे तथा शिक्षकों का अलग कैडर बनायेंगे।
2-सभी प्राइमरी स्कूल प्री-प्राइमरी स्कूल से सुसज्जित होंगे। आगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल कैम्पस में स्थापित किया जायेगा।
3-अधिगम सुनिश्चित किया जायेगा।
4-नो डिटेंशन अब कक्षा 05 तक होगा।
5-RTE को 12 वीं तक ले जाया जायेगा।
6-विज्ञान, गणित तथा अंग्रेजी का समान राष्ट्रीय पाठ्यक्रम होगा। सामाजिक विज्ञान का एक हिस्सा समान होगा, शेष का निर्माण राज्य करेंगे।
7-कक्षा 6 से ICT आरंभ होगी।
8-कक्षा 6 से विज्ञान सीखने के लिए प्रयोगशाला की सहायता ली जायेगी।
9-गणित, विज्ञान तथा अंग्रेजी के कक्षा 10 हेतु दो लेबल होंगे-A तथा B
10-कक्षा 10 व 12 में बोर्ड परीक्षा अनिवार्य।
11-ICT का शिक्षण तथा अधिगम सुनिश्चित करने हेतु प्रयोग।
12-विद्यालय के कार्यों का कम्प्यूटीकरण तथा शिक्षकों-छात्रों की उपस्थिति की ऑनलाइन मॉनिटरिंग।
13-राज्यों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिये अलग से 'शिक्षक भर्ती आयोग'। नियुक्ति पारदर्शी तथा मैरिट के आधार पर होगी।
14-सभी रिक्त पद भरे जाएं। प्रधानाचार्यों के लिये लीडरशिप ट्रेनिंग अनिवार्य।
15-राष्ट्रीय स्तर पर 'टीचर एजुकेशन विश्वविद्यालय' की स्थापना।
16-राष्ट्रीय पुरस्कारों को राज्य तथा जिला स्तर तक लाया जाये। अनुशंसा में SMC की महत्वपूर्ण भूमिका।
17-हर पांच साल में शिक्षकों को एक परीक्षा देनी होगी। इसे उनके प्रमोशन तथा इन्क्रीमेंट से जोड़ा जायेगा।
18-अगर राज्य चाहें तो कक्षा 05 तक मातृभाषा, स्थानीय तथा क्षेत्रीय भाषा को पढाई का माध्यम बना सकते हैं।
19-GDP का 6% शिक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश हो।
20-नयी संस्थाओं को खोलने के बजाय मौजूदा शिक्षण संस्थाओं को मजबूत किया जाये।
21-मिड डे मील का दायित्व शिक्षकों के ऊपर से हटाकर महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया जायेगा। भोजन बनाने की केंद्रिकत प्रणाली विकसित की जायेगी।
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