इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखते हुए सरकार-प्रशासन को जारी किया नोटिस।।
काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण की योजना को तब करारा झटका लगा, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने विस्तारीकरण से प्रभावित हो रहे किराएदार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह रोक लगाते हुए प्रशासन को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में वाराणसी के जिला प्रशासन सहित उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति यूसी त्रिपाठी की डबल बेंच ने किराएदार मुन्नी तिवारी और कुछ अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन, डीएम, एसएसपी और काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह को इस संबंध में 3 हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
कोर्ट की शरण में पहुंचे थे किराएदार
प्रशासन की तोड़क कार्रवाई के विरोध में किराएदार कोर्ट की शरण में पहुंच गए थे। उनका कहना है कि वाराणसी ज्ञानवापी मोड़ स्थित विट्ठल भवन को प्रशासन ने खरीद लिया है और विस्तारीकरण के नाम पर इसमें रह रहे 18 किराएदारों बेघर किया जा रहा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार और जिला प्रशासन को नोटिस देते हुए अब इस बारे में हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया था मकान मालिकों से सांठ-गांठ करके मन्दिर और जिला प्रशासन पहले विश्वनाथ मन्दिर के आसपास के मकानों को विस्तारीकरण के नाम पर खरीद रहा है और फिर वर्षो से उन मकानों में रह रहे किराएदारों को जबरन बेदखल कर ये मकान तोड़ दिए जा रहे हैं। ज्ञात हो कि वाराणसी के संत समाज और कई सामाजिक संगठन काशी मंदिर विस्तारीकरण की योजना का विरोध कर रहे हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण की योजना को तब करारा झटका लगा, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने विस्तारीकरण से प्रभावित हो रहे किराएदार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह रोक लगाते हुए प्रशासन को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में वाराणसी के जिला प्रशासन सहित उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति यूसी त्रिपाठी की डबल बेंच ने किराएदार मुन्नी तिवारी और कुछ अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन, डीएम, एसएसपी और काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह को इस संबंध में 3 हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
कोर्ट की शरण में पहुंचे थे किराएदार
प्रशासन की तोड़क कार्रवाई के विरोध में किराएदार कोर्ट की शरण में पहुंच गए थे। उनका कहना है कि वाराणसी ज्ञानवापी मोड़ स्थित विट्ठल भवन को प्रशासन ने खरीद लिया है और विस्तारीकरण के नाम पर इसमें रह रहे 18 किराएदारों बेघर किया जा रहा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार और जिला प्रशासन को नोटिस देते हुए अब इस बारे में हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया था मकान मालिकों से सांठ-गांठ करके मन्दिर और जिला प्रशासन पहले विश्वनाथ मन्दिर के आसपास के मकानों को विस्तारीकरण के नाम पर खरीद रहा है और फिर वर्षो से उन मकानों में रह रहे किराएदारों को जबरन बेदखल कर ये मकान तोड़ दिए जा रहे हैं। ज्ञात हो कि वाराणसी के संत समाज और कई सामाजिक संगठन काशी मंदिर विस्तारीकरण की योजना का विरोध कर रहे हैं।



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