सप्ताहांत - Kashi Patrika

सप्ताहांत

हफ्ते भर की खबरों का लेखा-जोखा।।


आम जन के चश्मे से देखें तो, इस हफ्ते महंगाई का पारा और ज्यादा चढ़ा। पहले से ही पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दाम से बेदम मध्यम वर्ग को रसोई गैस के दाम बढ़ाकर सरकार ने एक और झटका दिया। इस बीच, सरकार की बेरुखी से नाराज किसानों ने भी फल-सब्जियां-दूध फेंक कर आमजन की महंगाई के जख्म पर नमक छिड़कने का काम किया है। हालांकि, मौसम ने मेहरबानी दिखाते हुए रिमझिम फुहारों के साथ गर्मी से कुछ राहत दी।
लोकसभा-विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली पटखनी ने जहां विरोधियों को उत्साहित किया, वहीँ भजपाइयों को चिंतित। इन सबके बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश नीति को बखूबी परवान चढ़ाया, तो विदेश में कालेधन की जानकारी देने या बेनामी संपत्ति की सूचना देने पर 5 करोड़ तक का इनाम देने की सरकारी घोषणा ने लोगों को उत्साहित किया। बैंककर्मियों की दिक्कते, चिदंबरम को नोटिस, दिनेश शर्मा का “दिव्य ज्ञान” (सीताजी टेस्ट ट्यूब बेबी), कर्नाटक में पदमोह की खींचतान, सट्टेबाजी में अरबाज खान का नाम...खबरें सुर्खियों में दबकर घुट गईं, तो “ मय से न, मीना से...”गोविंदा स्टाइल में डांस करके विदिशा के प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव सोशल मीडिया पर छा गए।


जीने की जुगाड़ पर, महंगाई की मार
पेट्रोल-डीजल के दामों में तीन दिन से और बढ़ोतरी नहीं हुई, बल्कि कुछ पैसों की रियायत दी गई है, लेकिन पहले से पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमत आम जन के लिए मुसीबत बनी हुई है। ऐसे में, महंगाई में जीने की जुगाड़ तलाश रहे लोगों को केंद्र सरकार ने रसोई गैस के दाम बढ़ा कर झटका दिया। शुक्रवार( कल) से बिना सब्सिडी सिलेंडर पर 48 रुपये और सब्सिडी वाले सिलेंडर 2 रुपये महंगा कर दिया गया है। दिलचस्प यह है कि सरकार दाम बढ़ाती है रुपयों में और घटाते समय एक-एक पैसे का हिसाब किया जाता है। पहले दिन पेट्रोल-डीजल का दाम एक पैसे घटा, वहीं तीसरे दिन पैट्रोल की कीमत में 6 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 5 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई।  तिस पर किसानों की सरकार से नाराजगी का खामियाजा भी आम आदमी को ही भुगतना पड़ रहा है। फल-सब्जियों के दाम अचानक किसान आंदोलन के कारण बढ़ गए हैं और फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद भी नहीं है।

किसान पस्त, सरकार मस्त
मौसम विभाग की इस वर्ष ‘सामान्य वर्षा’ की सुखद भविष्यवाणी किसानों को उत्साहित करने की बजाय आंदोलित क्यों कर रही है?  बारिश पर ही भारत की कृषि निर्भर है और 2017-18 में 27.95 करोड़ टन अनाज के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। किसान की नाराजगी समझने की कोशिश करें, तो सच यह है कि साल-दर-साल रिकॉर्ड उपज से निश्चय ही खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और खाद्य महंगाई दर को काबू करने में मदद मिलती है, मगर त्रासदी यह है कि देश में चाहे सामान्य मानसून रहे या सूखे की स्थिति, किसानों की दशा बदस्तूर खस्ताहाल ही बनी रहती है। बल्कि, उपज ज्यादा होने पर किसानों को मंडियों में दाम और कम मिलते हैं।
नीति आयोग का अध्ययन भी बताता है कि 2011-12 और 2015-16 के दरम्यान किसानों की वास्तविक औसत आमदनी हर साल आधा फीसदी से भी कम यानी 0.44 प्रतिशत बढ़ी है। देश के 17 राज्यों के कृषि परिवार की औसत आय महज 20 हजार रुपये सालाना है। नीति-निर्माताओं की अक्षमता का खामियाजा किसान और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, नतीजतन उनमेँ रोष है और कैराना केंद्र सरकार के हाथ से छीनकर उन्होंने इसका संकेत दिया। अब 22 राज्यों में किसान सड़कों पर उतर आए हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ ने केंद्र सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों के विरोध में देश के 22 राज्यों में 1 जून से 10 जून तक हड़ताल का ऐलान किया है। किसान सब्जियों के न्यूनतम मूल्य, समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। फल-सब्जियां सड़क पर फेंके जा रहे हैं, हजारों टन दूध सड़कों पर बहाया जा रहा है। किसान 1 से 4 जून तक वे विरोध-प्रदर्शन करेंगे। 5 जून को 'धिक्कार दिवस' मनाएंगे, 6-7 जून को शहीद शहादत दिवस मनाया जाएगा, 8-9 जून को असहयोग दिवस और 10 जून को भारत बंद का ऐलान किया गया है।

गर्मी से राहत, पर आफत
चिलचिलाती धूप और गर्मी के कारण पसीने से सराबोर लोगों को रिमझिम फुहारों ने सिर्फ सुकून ही नहीं दिया, बल्कि गर्मी के जल्द विदाई की आस भी दी।
मानसून ने नियत समय से कुछ पहले दस्तक देकर चौंकाया, तो मौसम विभाग के इस वर्ष ‛सामान्य बारिश’ की खबर से गुदगुदाया। मौसम विभाग के मुताबिक, पूरे देश में जून से सितंबर के दरम्यान यह 96 से 104 फीसदी रहेगा। हालांकि, राहत के साथ कुछ आफत भी आई। पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई हिस्सों में शुक्रवार को मौसम का मिजाज बदलने से कई इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई और आंधी चली, जिसके चलते जहां एक ओर तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, तो वहीं दूसरी ओर लोगों की दिक्कतें भी बढ़ गईं।
उत्तराखंड में चार जगह बादल फटने की घटनाएं सामने आई। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में बिजली गिरने व बारिश की वजह से दीवार गिरने की घटनाओं में नौ लोगों की जान चली गई, जबकि कम से कम 12 लोग घायल हो गए। दिल्ली के अलीपुर में एक बिजली का खंभा गिर जाने से एक बाइक सवार की मौत हो गई, जबकि यूपी में दो लोगों की मौत हो गई।

मोदीजी विदेश में, भाजपा हारी देश में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरब की पूरब के तीन देशों इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर की यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। कारोबारी और रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से ये तीनों ही देश भारत के लिए अहमियत रखते हैं। प्रधानमंत्री ने तीन देशों की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान एक बार फिर अंतर सामुदायिक स्तर तक फैली भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक कड़ियों के विस्तार को दिखाने का प्रयास किया। साथ ही वो रक्षा और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देते हुए अंतरदेशीय संबंधों को मजबूत करते दिखे। चीन से मिल रही चुनौतियों को देखते हुए भारत के लिए पूर्वी देशों के बीच पैठ बनाना जरूरी हो गया है। इसमें कारोबार के साथ ही रणनीतिक तड़का लगाकर प्रधानमंत्री ने रिश्तों के नए आयाम लिखें, वहीँ भारत की धार्मिक-संस्कृतिक कड़ियों को जोड़ने-सहेजने का काम भी किया।
उधर, प्रधानमंत्री विदेश में रिश्तों की नई इबारत लिख रहे थे, उसी दौरान देश में उपचुनाव के परिणाम घोषित किए गए, जो भाजपा के लिए आशाजनक नहीं रहा। बीते गुरुवार को आए नतीजों में विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा और विधानसभा की 14 सीटों में 11 सीटें जीतीं, जबकि भगवा पार्टी और उसके सहयोगियों को केवल तीन सीटों पर सिमटना पड़ा। साल 2014 के बाद परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी हैं कि मोदी सरकार के इन 4 साल में जहां भी लोकसभा उपचुनाव हुए वहा भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद कुल 27 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, जिनमें से 14 सीटें भाजपा के कब्जे में थीं, लेकिन अब इनमें से महज 5 सीटें ही बच पाई हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी ने 9 सीटें गंवा दी हैं. यही वजह है कि लोकसभा में उसकी सीटों का आंकड़ा 282 से घटकर 273 रह गया है। यह भाजपा के लिए अच्छी खबर नहीं है। यह इस ओर इशारा है कि मोदी का जादू खत्म तो नहीं हुआ, पर कुछ फीका जरूर पड़ा है।

पांच करोड़ कमाने का मौका
विदेशों में कालेधन की जानकारी देने पर आयकर विभाग 5 करोड़ तक का इनाम देगा। वहीं, बेनामी लेन-देन और संपत्ति की जानकारी देने पर एक करोड़ तक का रिवॉर्ड मिलेगा। सीबीडीटी ने बेनामी ट्रांजेक्शंस इनफॉर्मेंट्स रिवॉर्ड स्कीम 2018 का ऐलान किया है। विदेश में कालेधन की जानकारी देने पर 5 करोड़, बेनामी संपत्ति के बारे में बताने पर 1 करोड़ तक का इनाम देने की घोषणा सरकार ने की है। इनकम टैक्स इन्फॉर्मेंट्स रिवॉर्ड स्कीम में संशोधन के तहत भारत में टैक्स चोरी की पुख्ता सूचना देने पर 50 लाख रुपए तक का इनाम दिया जाएगा।
जानकारी देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखने का भरोसा दिलाया गया है। साथ ही विदेशी नागरिक को भी रिवॉर्ड स्कीम के तहत सूचना देने का मौका दिया गया है। सीबीटीडी के मुताबिक इस योजना का लोगों को इस तरह की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करना है। ताकि इस तरह के ट्रांजेक्शन या प्रॉपर्टी और इनसे हुई कमाई की जानकारी सामने आ सके।

सोशल मीडिया पर छाए संजीव
विदिशा के प्रोफेसर को भी इसका अंदाजा नहीँ रहा होगा कि उनका डांस वीडियो इस धमाल मचाएगा। फिलहाल, हर कोई संजीव श्रीवास्तव का वीडियो हर कोई शेयर कर रहा है। पहले उन्होंने फिल्म खुदगर्ज का गाना 'आप के आ जाने से' पर डांस किया। एक ही दिन में लाखों लोगों ने उनका ये वीडियो शेयर किया। लोगों ने उनके इस वीडियो को काफी पसंद किया था,  “अंकल का गोविंदा स्टाइल खूब पसंद आया।” अब अंकल का दूसरा वीडियो सामने आया है, जिसमें संजीव 'चढ़ती जवानी' पर डांस कर रहे हैं। ये वीडियो भी उसी शादी का है, जिसमें उन्होंने पहले परफॉर्मेंस दिया था। संजीव की लोकप्रियता इस कदर बढ़ रही है कि एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके तारीफ में ट्विटर पर कसीदे पढ़ दिए हैं।

अंततः कैफी आजमी की पंक्ति, “ ऐसी महँगाई है कि चेहरा भी, बेच के अपना खा गया कोई।।”

■ सोनी सिंह 

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