जी हाँ, आप को ये जान कर ताजुब्ब होगा कि आज की हमारी केंद्र सरकार मिडिया ट्रायल पर चल रही हैं वो भी सोशल मिडिया ट्रायल पर। आप कोई भी खबर पॉपुलर करे और सरकार अपनी नीति और दिशा बदलती दिखाई देगी। ताज़ा आंकड़े तो कम से कम यही बताते हैं।इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है कैराना जहाँ लोगों ने जिन्ना को इतना ज्यादा ट्वीट और फेसबुक पर शेयर किया कि भाजपा ने उसे मुद्दा समझ लिया। इसी का दूसरा उदाहरण हैं कर्णाटक में भाजपा के सरकार न बनाने के लिए लोगों द्वारा किया गया ट्वीट और फेसबुक पोस्ट।
आप को ज्ञात ही होगा की वहां चुनाव परिणामों के बाद भाजपा का कोई भी बड़ा नेता नहीं पहुँचा और नतीजा ये हुआ की कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना लिया।
हालिया बयानों में सरकार हिन्दू वादी मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तयारी में है ये भी फेसबुक और ट्विटर का ही कमाल है। फेसबुक और ट्विटर के आकड़े बताते है कि प्रधानमंत्री मोदी की पॉपुलैरिटी में कमी आई हैं और भाजपा को २०१९ का चुनाव हिंदूवादी विचारधारा पर लड़ना होगा। तो अब तो आप समझ ही गए होंगे की आधुनिक परिवेश और आज के समाज के अनुरूप हमारी केंद्र सरकार भी फेसबुकिया और ट्विटरिया हैं।
आप वर्तमान केंद्र सरकार के कामकाजों का लेखा जोखा उठा ले सुरेश प्रभु की ट्वीट से चलने वाली रेलगाड़ी, सुषमा स्वराज की ट्विटर से चलने वाली विदेश नीति या मोदी एप के माध्यम से चलने वाली सरकार। जी हाँ आधुनिक परिवेश में केंद्र सरकार अपनी दिशा और दशा फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से निश्चित करते हैं।
तो अगर आप भी सरकार के पक्ष या विपक्ष में है तो जल्दी से एक ट्वीट या फेसबुक पोस्ट डाल दे क्या पता सरकार आप को भी अपनी नीति निर्धारण के केंद्र में रखकर कोई नियम बना दे।
-सिद्धार्थ सिंह


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