२१ जून योग दिवस पर: भुखासन - Kashi Patrika

२१ जून योग दिवस पर: भुखासन


भारत सदियों से ज्ञान-विज्ञान का देश रहा हैं। यहाँ के लोगों ने संस्कृत जैसी परिष्कृत भाषा के सूत्र लिखे तो शून्य और खगोलीय विज्ञान को बहुत कुछ दिया भी। आचार्यों ने चार पुरुषार्थों को जन्म दिया तो आयुर्वेद जैसी सरल विद्या को विस्तारित किया। धर्म के वास्तविक स्वरूप पर गहन मनन चिंतन कर विश्व गुरू की पदवी भी प्राप्त की। योग के सूत्र लिखे और आज की स्थिति भुखासन पर निबंध लिखवा रही हैं। 

२१ जून सन २०१५ से पूरा विश्व योग दिवस मना रहा हैं तो क्या भारत की तत्कालीन स्थिति बदल गई, जहाँ हर ओर गरीबी का वास है, बेरोजगारी ने इसे सालों से जकड़ रखा हैं। भ्रस्टाचार का कुतन्त्र शासन तंत्र पर हावी हैं और गाहे-बगाहे कुछ मौते गरीबी से होती ही रहती हैं। 

सरकार तंत्र के अपने आकड़े होते हैं, और नेताओं के भाषणों की अगर माने तो पिछले चार सालों में बहुत कुछ बदल गया हैं। शिक्षा का स्तर बढ़ गया हैं, गरीबी कम हो गई हैं, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। लगभग पूरा भारत ही बदल रहा हैं। पर क्या ये बदलाव वाकई में हो रहा हैं। 

जनवरी २०१९ में एक आकड़े आए थे जिसमे १७ से घटकर ३%  लोग ये मानते हैं कि उनके जीवन में जो बदलाव है वो सुखद हैं। महंगाई के आकड़े ये बताते हैं कि रसोई गैस के दाम दुगने और पेट्रोल महंगाई के उच्चत्तम स्तर पर हैं। बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई हैं। किसान आंदोलन की राह अपना रहे हैं तो युवा आत्महत्या करते नजर आ रहे हैं। 

ऐसे में आइये प्रण लेते हैं कि इस बार योग दिवस को सफल बनाने के लिए हम सब मिलकर २१ जून को भुखासन करते हैं इसके द्वारा आप हम सरकार का दिया फिटनेस चैलेंज जरूर स्वीकार कर लेंगे। 

: सिद्धार्थ सिंह 

No comments:

Post a Comment