आए दिन होने वाले भाषणों और दिखावे की राजनीती के बीच, आज युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहा हैं। उसे अपनी जिंदगी की शुरुआत करने का पर्याप्त मौका सरकार उपलब्ध नहीं करवा पा रही हैं। चाहे लड़कियों के शसक्तीकरण का मुद्दा हो या युवाओं को उनके मन माफिक रोजगार के क्षेत्र उपलब्ध करवाना, दोनों पर तत्कालीन सरकार पूर्ण रूप से फेल साबित हुई हैं।
हमने कुछ युवाओं से बात कि इसमें युवाओं के दिए शब्द चौकाने वाले थे उनका कहना था कि केंद्र सरकार पूरे चार साल केवल राजनीतिक रंग में नजर आई। हर मामले पर पक्ष और विपक्ष केवल राजनीति करती नजर आई। विकास के नाम पर केवल सड़के और बिजली की व्यवस्था ही सरकार कर पाई हैं जो कि वर्तमान जरूरतों के हिसाब से बिलकुल अधूरे हैं।
युवाओं के जोश के अनुसार न तो सामाजिक बदलाव को सरकार ने गति देने का कार्य किया और न ही उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त क्षेत्रों का ही विस्तार किया। सरकार केवल वादों पर वादे करती रही और युवाओं का भविष्य केवल खेल और हसीं मजाक का विषय बनकर रह गया।
राजनीति में भी युवाओं का पदार्पण न के बराबर ही हुआ जो अपनी नीतियां खुद बना सके और उनपर भविष्य की योजनाओं के अनुसार काम कर सके।
दबी जुबान में सरकार ने निजीकरण को इतना बढ़ावा दिया कि युवा आज खुद को सरकारों से दूर और निजी कंपनियों के ज्यादा करीब पा रहे हैं।
युवाओं का यहाँ तक कहना हैं कि सरकार केवल विज्ञापन पर चल रही हैं और अब मोदी युवाओं के सर्वमान्य नेता नहीं रहे हैं। उनमे आज उत्सुकता हैं कि मोदी अगर कार्य नहीं कर पाए तो उनका विकल्प कौन होगा?
हमने युवाओं से सवाल किया कि क्या वो आधुनिकरण और सामाजिक क्रांति में सोशल मिडिया को भागीदार मानते हैं उनका जबाब हाँ में था। युवाओं का खुले तौर पर कहना था कि आज सोशल मिडिया ही सरकार हो गई हैं और केंद्र सरकार की नीतियों पर हम खुल कर अपने विचार साझा कर सकते हैं।
अब जिस देश का युवा सोशल मिडिया को सरकार मान ले उसका भविष्य क्या होगा आप खुद ही समझ सकते हैं ऐसे में सामाजिक दायित्व का निर्वाह करने वाले लोगों को बड़े पैमाने पर सामने आना होगा और युवाओं को सही दिशा दिखाने का कार्य करना होगा।
:सिद्धार्थ सिंह



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