केंद्र सरकार ने देश के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले संघ की नियुक्तियों में लेटरल नियुक्ति का रास्ता साफ़ कर दिया हैं। 10 पदों के लिए सीधी भर्ती के विज्ञापन भी जारी कर दिए गए हैं। तो क्या ये माना जाए कि अब सरकार पूर्ण रूप से ही निजीकरण के रास्ते पर बढ़ चुकी हैं। अब निजी क्षेत्र के कर्मचारी केवल साक्षात्कार के माध्यम से सरकार के उच्च पदों पर आसीन हो जाएंगे।
सरकार का तर्क हैं कि वो इस माध्यम से योग्य लोगों को उच्च पद प्रदान कर सकती हैं और सभी क्षेत्रों के प्रतिभावान लोगों की सरकार में भागीदारी बढ़ाना चाहती हैं। पर इस पर कौन-कौन लोग आसीन होंगे ये देखना दिलचस्प होगा। क्योकि इस सरकार पर यह आक्षेप लगते रहे हैं कि इसने अपने लोगों को उच्च पदों पर बैठने के लिए संविधान तक को ताक पर रख दिया हैं।
विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया हैं और वो इसे साफ़ तौर पर कह रही हैं कि संघ से जुड़े लोगों को उच्च पदों पर बिठाने के लिए ऐसा किया जा रहा हैं। तो क्या इसमें कुछ सच्चाई हैं। लगता तो ऐसा ही हैं। सरकार के अंतिम वर्ष में ऐसा फैसला लेना थोड़ा अजीब लग रहा हैं।
आने वाला समय बताएगा जब सरकार को ज्यादा से ज्यादा नोकरिया देने का समय हैं तो मोदी सरकार कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने को ऐसा निर्णय क्यों ले रही हैं। विपक्ष का तो यहाँ तक कहना हैं कि सरकार अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं और अब केवल समय बिताने और अपने लोगों में रेवरिया बाटने का काम ही कर रही हैं।
इन सब के बीच भारत में बढ़ती बेरोजगारी से कैसे निपटा जाएगा इसपे सावल किए जाने पर केंद्र सरकार के नेता बगली झाकते नजर आए।
सरकार का तर्क हैं कि वो इस माध्यम से योग्य लोगों को उच्च पद प्रदान कर सकती हैं और सभी क्षेत्रों के प्रतिभावान लोगों की सरकार में भागीदारी बढ़ाना चाहती हैं। पर इस पर कौन-कौन लोग आसीन होंगे ये देखना दिलचस्प होगा। क्योकि इस सरकार पर यह आक्षेप लगते रहे हैं कि इसने अपने लोगों को उच्च पदों पर बैठने के लिए संविधान तक को ताक पर रख दिया हैं।
विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया हैं और वो इसे साफ़ तौर पर कह रही हैं कि संघ से जुड़े लोगों को उच्च पदों पर बिठाने के लिए ऐसा किया जा रहा हैं। तो क्या इसमें कुछ सच्चाई हैं। लगता तो ऐसा ही हैं। सरकार के अंतिम वर्ष में ऐसा फैसला लेना थोड़ा अजीब लग रहा हैं।
आने वाला समय बताएगा जब सरकार को ज्यादा से ज्यादा नोकरिया देने का समय हैं तो मोदी सरकार कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने को ऐसा निर्णय क्यों ले रही हैं। विपक्ष का तो यहाँ तक कहना हैं कि सरकार अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं और अब केवल समय बिताने और अपने लोगों में रेवरिया बाटने का काम ही कर रही हैं।
इन सब के बीच भारत में बढ़ती बेरोजगारी से कैसे निपटा जाएगा इसपे सावल किए जाने पर केंद्र सरकार के नेता बगली झाकते नजर आए।


No comments:
Post a Comment