काशी का समुचित विकास भारत की सांस्कृतिक राजधानी का समुचित विकास हैं। सालों से उपेक्षित भारत की इस सांस्कृतिक राजधानी का विकास आसान कार्य नहीं हैं। इसके लिए धनबल, विकास की योजनाओं के साथ-साथ दृढ इक्षा शक्ति चाहिए। केंद्र सरकार ने पिछले चार सालों में बहुत सी योजनाओं को लागू किया। विकास कार्यों के लिए नई भूमि का आवंटन किया और लोगों को उनके कार्यों के अनुसार चिन्हित किया,जिससे उनका समुचित विकास किया जा सके।
आईए अपनी इस रिपोर्ट में देखते हैं कि केंद्र सरकार ने पिछले चार सालों में काशी को क्योटों बनाने के लिए क्या किया।
काशी के घाटों का विकास : काशी अपने मंदिरों और घाटों के लिए जानी जाती हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए अत्यधिक धन व्यय किया। पर परिणाम सामने आने में इतनी देर हो गई की काशी के घाट अब भी अपनी भव्यता को प्राप्त करने में असमर्थ दिखाई पड़ते हैं। योजनाओं के सही प्रकार से निष्पादन न हो पाने और लोकल प्रशासन की हिला-हवाली की वजह से करोड़ो रूपए व्यर्थ होते दिखाई पड़ते हैं।
काशी के मंदिरों का जीर्णोद्धार : काशी के मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार की कोई भी योजना सफल होती दिखाई नहीं दी। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना 'काशी विश्वनाथ कॉरिडोर' यहाँ के क्षेत्रीय लोगों के विरोध के कारण बाधित हो गई अब तो इलाहबाद हाईकोर्ट ने भी इस पर रोक लगा दी हैं।
काशी की गलियों का विकास : केंद्र सरकार ने ह्रदय योजना के तहत उन क्षेत्रों को चिन्हित और उनके विकास के लिए ह्रदय योजना लेकर आई। कई गलियों का विकास म्यूरल और पेंटिग्स के माध्यम से करने की इस योजना ने बनीमत काशी की गलियों की स्थिति कुछ हद तक बदली। पर इनका अभी भव्य रूप उभर कर आने में समय लगेगा। इन सब के बीच कूड़े के समुचित निस्तारण की योजना ठीक रूप से लागु न हो पाने की वजह से आज भी काशी की ये महत्वपूर्ण गलियां गंदगी और कूड़े के ढेर में तब्दील हो जाती हैं।
गंगा सफाई अभियान : गंगा सफाई अभियान में तो सरकार की और कोई भी कार्य नहीं हुआ हैं। कभी केंद्रीय मंत्री बदले गए तो कभी अधिकारीयों के कार्य न करने का हवाला देकर सरकार बगले झाकती नजर आई। जाह्न्वी आज भी स्थिति पर कायम हैं और निकट भविष्य में इसके लिए कोई कार्य हो ऐसा भी दिखाई नहीं देता।
काशी में रोजगार के अवसर पैदा करना : इस मद में सरकार ने बुनकरों और पर्यटन को बढ़ावा देने की लिए हलाकि की कुछ कार्य किये पर धरातल पर उनका फल कम ही दिखाई दिया। कुछ ही लोग रोजगार प्राप्त कर पाए वो भी संख्या इतनी कम है कि उन्हें वास्तविक रोजगार में रखना विकपक्ष के आरोपों से नाइंसाफी होगी।
काशी के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास : इस मद में सरकार ने काफी धन व्यय किया और इसके परिणाम धरातल पर दिखने भी लगे हैं। पर अभी इन योजनाओं के सही रूप से क्रियान्वयन में काफी समय लगने वाला हैं।
:सिद्धार्थ



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