...कब भेजोगे दर्द का बादल, कब बरखा बरसाओगे - Kashi Patrika

...कब भेजोगे दर्द का बादल, कब बरखा बरसाओगे

कब तक दिल की खैर मनाएँ, कब तक रह दिखलाओगे,
कब तक चैन की मोहलत दोगे, कब तक याद न आओगे,

बीता दीद उम्मीद का मौसम, खाक उड़ती है आँखों में,
कब भेजोगे दर्द का बादल, कब बरखा बरसाओगे,

अहद-ए-वफा या तर्क-ए-मोहब्बत, जो चाहो सो आप करो,
अपने बस की बात ही क्या है, हम से क्या मनवाओगे,

किस ने वस्ल का सूरज देखा, किस पर हिज्र की रात ढली,
गेसुओं वाले कौन थे क्या थे उन को क्या जतलाओगे,

'फैज' दिलों के भाग में है, घर भरना भी लुट जाना थी,
तुम इस हुस्न के, लुत्फ़-ओ-करम पर कितने दिन इतराओगे।।
फैज अहमद फैज

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