“एक देश में दो विधान...नहीं चलेंगे” - Kashi Patrika

“एक देश में दो विधान...नहीं चलेंगे”

पुण्यतिथि विशेष।। 
जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने और 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान , दो निशान- नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे' का नारा बुलंद करने वाले डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी की जम्मू-कश्मीर की जेल में 23 जून, 1953 को रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। जनसंघ(वर्तमान भाजपा) के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत का रहस्य आज भी बरकरार है.

   
भारतीय राजनीति में कांग्रेस के एकाधिकारी को चुनौती देने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद की पुण्यतिथि के मौके पर कई जगहों पर उनको श्रद्धांजलि दी गई है. 'जनसंघ' बाद में भारतीय जनता पार्टी में बदल गई. अटल बिहारी बाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने भी जनसंघ से राजनीति की शुरुआत की थी. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित जवाहर लाल नेहरू की कैबिनेट में थे. लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और नई पार्टी बनाई थी. पुण्यतिथि के मौके पर उनसे जुड़ी कुछ बातें-
★डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1907 कोलकाता के भवानीपुर में में हुआ था. वो स्कूल की पढ़ाई के के बाद वकालत की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए थे.

★बाल गांगधर के तिलक के बीमार होे जाने पर मुखर्जी को 1940 में हिंदू महासभा का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया.

★ भारत के विभाजन के निर्णय पर वह असहमत थे. हालांकि गांधी जी और पटेल जी के कहने पर वह नेहरू मंत्रिमंडल में शामिल हो गए. लेकिन राष्ट्रवादी विचारों के चलते उनके मतभेद भी सबसे बने रहे.

★इसके चलते बाद में उन्होंने नेहरू जी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और अक्टूबर 1951 में उन्होंने जनसंघ की स्थापना की और पूरी ताकत से कांग्रेस की नीतियों का विरोध करना शुरू कर दिया.

★कश्मीर में धारा 370 के खिलाफ संसद में सबसे पहले उन्होंने ही आवाज उठाई थी. उस समय में जम्मू-कश्मीर में जाने के लिए परमिट की जरूरत पड़ी थी और वहां के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था. मुखर्जी राज्य के अलग संविधान और झंडे के खिलाफ थे.

★1952 में जम्मू में आयोजित एक रैली में कहा था कि या तो वह राज्य के लोगों को भारत का संविधान के नीचे लाएंगे या फिर वह बलिदान दे देंगे.

★अपने इसी संकल्प के चलते मुखर्जी 22 जून 1953 को बिना परमिट के ही जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर  निकल पड़े. वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और अगले ही दिन रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई.

★ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मुताबिक नजरबंदी के समय पत्रकार के तौर वह भी उनके साथ थे.

★राजनीतिक इतिहास में इस बात का जिक्र है कि एक बार महात्मा गांधी जी ने मुखर्जी से कहा ' सृष्टि और उसके प्राणियों की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकला विष पीकर जो कार्य भगवान शिव ने किया था, उसी प्रकार भारतीय राजनीति का विष पीने के लिए भी किसी की आवश्यकता थी, तुम वहीं काम करोगे.'
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