कश्मीर में पूर्ण रूप से विफल मोदी - Kashi Patrika

कश्मीर में पूर्ण रूप से विफल मोदी

आज देश में केवल एक पार्टी का शासन हैं। उस पार्टी का नाम है बीजेपी। और पार्टी का एक मात्र चेहरा हैं नरेंद्र मोदी। पार्टी ने नारा भी राजनीति में मोनोपॉली स्थापित करने वाला दिया हैं कांग्रेस मुक्त भारत। इस नारे के साथ बीजेपी को बहुत सफलता मिली और उस ने भारत के आजादी के बाद के शासन को लगभग नकार दिया। गाहे-बगाहे बीजेपी ने इस नारे को इतना भुनाया की आज बीजेपी खुद इस में फसती नजर आ रही हैं।


मोदी ने पुरजोर तरीके से कांग्रेस को नकारा और देश की दिशा परिवर्तित करने का भरोसा दिलाया। पर नतीजा जुमलों में तब्दील हो गया। कश्मीर में मोदी पूरी तरह से विफल दिखाई दिए। कभी उन्होंने महबूबा मुफ़्ती की प्रशंसा में कसीदे पढ़े तो कभी विकास का नारा बुलंद किया।  पर नतीजा कुछ भी नहीं निकला।

आज कश्मीर की जो स्थिति हैं उसमे मोदी का पूरा योगदान रहा हैं। केंद्र सरकार की कश्मीर के प्रति कोई पुख्ता नीति न होने का खामियाजा आज पूरा भारत भुगत रहा हैं। मोदी सरकार के कश्मीर के नागरिकों से किए खोखले वादे का ही परिणाम हैं कि आज वहां की स्थिति बद से बदतर हो गई हैं।

विपक्ष के आरोपों में कही न कही सच्चाई दिखाई पड़ती हैं जिसमे उसने कहाँ है कि मोदी ने केवल सत्ता का सुख भोगने तक कश्मीर में सरकार चलाया। आज जब मामला बिगड़ता दिखाई पड़ा तो मोदी से अपने दामन को पाक साफ़ करने के लिए सारे आरोप महबूबा मुफ़्ती पर मढ़ दिए। अगर मोदी के पास कश्मीर समस्या का समाधान नहीं था तो फिर उनके वादों का क्या हुआ। तो हम सब जानते हैं कि मोदी की सरकार चालने की नीति केवल घोषणाए करने और जुमले देने तक सीमित रही हैं।

हाल ही में शिव सेना ने मोदी पर खुल कर आरोप लगाया हैं कि मोदी सरकार केवल घोषणाओं और जुमलों की सरकार हैं। जब सत्ता पक्ष का घटक दल ही मोदी पर ऐसे आरोप लगा रहा हो तो विपक्ष के दावों में कही न कहीं सच्चाई आवश्य हैं। इसी तरह के आरोप कहीं न कही नितीश कुमार ने भी लगाए थे और एनडीए का साथ छोड़ा था। खैर वो मुद्दा अलग हैं कि बाद में नितीश कुमार मोदी के साथ गठबंधन करने को तैयार हो गए। पर रिश्तों में पड़ी लकीर समय समय पर बाहर आती रही हैं हालिया नीतीश कुमार ने योग दिवस से किनारा कर मोदी को ये जता दिया कि उनकी सरकार में सबकुछ ठीक नहीं हैं।

इन सब के बीच मोदी की राजनीतिक विफलता उस समय खुल कर सामने आ गई जब उन्होंने पीडीपी के साथ चली 3 सालों की गठबंधन सरकार से हाथ खींच लिया। ये उस समय हुआ जब केंद्र सरकार अपने चार साल और राज्य सरकार अपने तीन साल पूरा कर चुकी थी। जानकारों की माने तो अभी कश्मीर की स्थिति सबसे भयावह बानी हुई हैं उस समय मोदी का यूँ हाथ खींचना गंभीर मामलों पर उनकी विफलता को प्रदर्शित करता हैं।

आज दुनिया की लगभग सभी मान्य संस्थान पीओके को पकिस्तान के नक़्शे में दिखा रहीं हैं और आक्साई चीन को चीन के नक़्शे में। तो उस समय मोदी ने ऐसा निर्णय क्यों लिया इसपर उनसे सभी को जबाब की उम्मीद हैं। अब यह जबाब किस रूप में आता हैं ये खुद मोदी ही बता सकते हैं। हाँ इतना जरूर हैं कि बीजेपी के नेताओं के बोल कश्मीर पर 2019 केंद्र के चुनावों से जुड़े ज्यादा दिखाई देते हैं और कश्मीर समस्या के हल से कम। इतने गंभीर मुद्दे पर कही ऐसा न हो कि मोदी फिर कोई जुमला दे कर बच जाए। 

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