मुझे मलाल भी उस की तरफ से होता है,
मगर ये हाल भी उस की तरफ से होता है।
मैं टूटता भी हूँ और खुद ही जुड़ भी जाता हूँ,
कि ये कमाल भी उस की तरफ से होता है।
पुकारता भी वही है मुझे सफर के लिए,
सफर मुहाल भी उस की तरफ से होता है।
जवाब देता है मेरे हर इक सवाल का वो,
मगर सवाल भी उस की तरफ से होता है।
वो मेरे हाल से मुझ को ही बे-खबर कर दे,
ये एहतिमाल भी उस की तरफ से होता है।
मैं उस के हिज्र में क्यूँ टूट कर नहीं रोया,
ये इक सवाल भी उस की तरफ से होता है।
जब आगही मुझे गुमराह करती है 'मोहसिन',
जुनूँ बहाल भी उस की तरफ से होता है।
■ मोहसिन असरार




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