
“राम तेरी गंगा मैली हो गई” इस गीत की आगे की पंक्तियां भले ही यहां मतलब न रखती हो, लेकिन बढ़ते प्रदूषण के कारण दिन-ब-दिन मैली होती माँ गंगा अब घटते जलस्तर को लेकर चर्चा में हैं। हालत यह है कि गंगा किनारे रहने वाले काशीवासियों को पानी को तरसना पड़ रहा है। वह भी उस स्थिति में जब स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां के सांसद हैं और उन्होंने स्वयं कहा था, “माँ गंगा की पुकार पर यहां आया हूं।” इतना ही नहीं मीडिया की ओर से गंगा के घटते जलस्तर को लेकर लगातार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा था।
पेयजल में कटौती
गंगा के जलस्तर में प्रतिदिन सात सेंटीमीटर का घटाव हो रहा है और जलापूर्ति के लिए काशीवासी गंगा पर ही निर्भर हैं। मगर घटते जलस्तर के चलते जलकल विभाग गंगा से मांग के सापेक्ष पानी लिफ्ट नहीं कर पा रहा है। नतीजतन, कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के घंटों में कटौती कर दी गई है।
जलकल विभाग ने जारी किया अलर्ट
वाराणसी में पहली बार ऐसा हुआ है कि जलकल विभाग को पानी के लिए अलर्ट जारी करना पड़ा है। शहरवासियों से अपील की गई है कि पानी को बचाकर रखें, कम खर्च करें, क्योंकि आने वाले समय में हो सकता है कि जल की आपूर्ति ठप हो जाए या कमी आये।
गंगा में पानी की दशा
गंगा में पानी की इतनी कमी हो गई है कि रेत के टीले दूर-दूर तक नजर आने लगे हैं। कई जगहों पर तो सिर्फ घुटने भर पानी है। गंगा घाटों की सीढ़ियों को छोड़ कर नीचे खिसक गई हैं। यहाँ तक की कम पानी की वजह से भदैनी स्थित पंप बंद हो गया है और दूसरे पंपों का भी हाल लगभग यही है। भदैनी स्टेशन के पास पानी की सप्लाई के लिए जो कुआं बनाया गया है, उसमें पंप को 15 से 20 फुट तक डूबा होना चाहिये, लेकिन गंगा में पानी की कमी होने के कारण कुएं में पानी बेहद कम हो गया है। पानी की कमी की वजह से तीन में से एक पम्प बंद कर दिया गया है, जिससे पानी की आपूर्ति पर असर पड़ा है।
आंकड़ों की नजर से
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्तमान में गंगा का जल स्तर 57.52 मीटर है, जो 2010 के सबसे कम वाटर लेवल 57.1 मीटर से महज 51 सेंटीमीटर ही दूर है। इसके बाद यह भी साफ हो रहा है कि गंगा का जलस्तर जिस रफ्तार से घट रहा है, वह कायम रहा तो आने वाले दौर में संकट बड़ा होगा। इस समस्या पर जलकल विभाग के महाप्रबंधक का कहना है कि गंगा का जल स्तर 200 फिट से नीचे नहीं होना चाहिये। यदि ऐसा होता है, तो कहीं न कहीं जल संकट शुरू हो जाएगा। अब तक गंगा का जल स्तर 189 फिट तक दर्ज़ हुआ है, लेकिन अभी तीन दिनों से इससे भी नीचे 187 फिर पर स्थिर है। अगर जल स्तर नहीं बढ़ा तो हालत बेकाबू हो जायेंगे।
नागरिकों में सरकार के प्रति रोष
इस जलसंकट से त्रस्त शहरवासियों ने सड़क पर उतरना शुरू कर दिया है। वहीं काशी के लोगों में इस विषय को लेकर केंद्र सरकार के प्रति भी नाराजगी देखी जा रही है। काशीवासियों में तो यह चर्चा भी हो रही है कि लगता है माँ गंगा ने मोदीजी को अब पुकारना छोड़ दिया है। राजनेताओं के बयान से उनका विश्वास भी डगमगाने लगा है।
■ काशी पत्रिका
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