
पूर्ण बहुमत से बनी मोदी सरकार के आज चार साल पूरे हो गए हैं। न तो लोगों में प्रधानमंत्री के लिए वो जोश बचा है, जब उनके कहने पर पूरा देश लाइन में लग गया था, और न ही वो जज्बा बचा है, जो मंचासीन मोदी के हर अंदाज पे तालियां बजाते नहीं थकता था। कमोबेश स्थिति का आकलन भी आवश्यक है। आज पूर्ण हो रहे मोदी सरकार के चार वर्षों पर आईये एक नजर डालतें हैं-
मोदी सरकार का पहला फैसला 'काले धन' के खिलाफ : केंद्र की सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने काले धन के खिलाफ अभियान शुरू किया, तो लोगों को लगा की उनकी फ़रियाद को सुनने वाला कोई तो केंद्र की मुख्य राजनैतिक स्थिति में पहुंचा। जो मुद्दों से ज्यादा कार्य करने में विश्वास करता हैं। काला धन देश को दीमक की तरह चाटे जा रहा था। अब जब नई सरकार आई हैं, तो इसका निदान होगा। बीते चार सालों में विदेश में छिपे काले धन का एक रुपया भी देश में वापस नहीं आया। लोगों का कहना हैं कि उलटे मोदी सरकार ने उनके विपरीत समय के लिए बचे पैसे को भी नोटबंदी के माध्यम से जमा करवा लिया।
राम मंदिर निर्माण : बीजेपी राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा लेकर केंद्र की सत्ता में ये दूसरी बार पदार्पित हो रही थी और वो भी पूर्ण बहुमत के साथ। लोगों को लगा की अब उनके राम लला को खुले आसमान के नीचे टेंट में नहीं रहना होगा। पर इस मुद्दे को टालने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वो आज तक जारी है। लोगों का कहना है कि एक के बाद एक बीजेपी सभी राज्यों में सत्ता की सीढ़ी चढ़ती गई और रामलला को दरकिनार कर दिया गया।
सबका साथ, सबका विकास : डॉ मनमोहन सिंह के शथिलता से भरे शासन के अंतिम दिनों में जो विकास की रफ़्तार थमती नजर आ रही थी, वो मोदी सरकार के आने के बाद कमोबेश बदल गई। लोगों ने उत्साह के साथ सरकार के हर क्रियाकलापों के साथ अर्थव्यवस्था में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। परिणाम स्वरूप अर्थव्यवस्था में उछाल आया। पर आज जब हम मोदी सरकार के चार सालों के कार्यकाल का आकलन करने बैठते है, तो जन भागीदारी के माध्यम से सरकार ने अपनी बहुत सी योजनाओं को अमली जमा पहनाया, पर लोगों को रोजगार के मुद्दे पर अब तक पकौड़े बेचने के स्वरोजगार तक सीमित है।
बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर : इस मद पर सरकार ने काफी तत्परता दिखाई है और बड़े पैमाने पर देश में सड़को, प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों, शौचालयों का निर्माण किया हैं। हाँ ये बात अलग हैं कि इनमे खर्च का जो आकड़ा है और बने शौचालयों की जो स्थिति है वो चिंता का विषय हैं।
शिक्षा और रोजगार : बेसिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का न तो खास योगदान रहा और न ही उसने इसपे ज्यादा ध्यान ही दिया। सरकार के बीच कार्यकाल में सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्री को बदल दिया और नई शिक्षा नीति लाने की घोषणा करती रही। रोजगार का मुद्दा तो दूर दूर तक सरकार की प्राथमिकता में नजर नहीं आया। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुछ स्किल डेवलपमेंट के कोर्स शुरू किये गए पर उनके आकड़े अभी आना बाकि है और उस से लोगों को कितना रोजगार मिला ये भी चर्चा का विषय हैं।
बिजली व्यवस्था : सरकार ने इस क्षेत्र में भी नई उचाईयों को छुआ और लगभग हर जगह बिजली का विस्तार किया। कई ऐसे गावों में जहाँ आजादी के बाद आज तक बिजली का विस्तार नहीं किया था वहां बिजली पहुंचाई।
गंगा सफाई : माँ गंगा के बुलावे पर काशी आए प्रधानमंत्री मोदी गंगा को ही भूल गए। कागजी लीपा-पोती के आलावा गंगा सफाई अभियान को अभी तक कोई सुनियोजित दिशा न दे पाना मोदी सरकार की बड़ी नाकामियों में से एक हैं।


No comments:
Post a Comment