भाजपा सरकार के चार साल पूरा होने पर मंत्रीजी उपलब्धियां गिना रहे थे। मंत्रीजी प्रफुल्लित थे। हालांकि, कुछ “बेतुके” सवाल सुनकर उनके चेहरे की रंगत बीच-बीच में उड़ जाती। मुझे सब थोड़ा उबाऊ सा लग रहा था, सो ध्यान इधर-उधर भटका। हमसे थोड़ी दूरी पर बैठी एक बच्ची आसपास की गतिविधियों से अनभिज्ञ मिट्टी का घरौंदा बनाने में तल्लीन थी। बच्ची की उम्र चार के करीब होगी। घर की नींव तैयार थी, ऊपर दीवार बनाने की कोशिश मेँ वह मिट्टी को गीला करती, फिर उससे दीवार बनाती। एक तरफ की दीवार बनाती, तो कभी दूसरी तरफ की दीवार ढह जाती, किंतु हार माने बिना वह जुटी रही। कड़ी मशक्कत के बाद घर का खाका तैयार हो गया। अब वह शायद खिड़कियां या दरवाजा बनाने की जुगत लगा रही थी। बगल में लकड़ियों के नन्हे टुकड़े पड़े थे, जिसे हाथ में उठा कर वह कभी झुक कर घर में झांकती, अगले पल फिर बैठ जाती। कभी घर को देखकर अपनी मेहनत पर इतराती सी लगती। कुल मिलाकर उसके चेहरे से संतुष्टि झलक रही थी।
बच्ची अपने काम में उलझी ही थी कि एक आठ-नौ साल का बच्चा दूर से लड़की को पुकारता, “काशी...काशी...” हुआ आया। घरौंदा देख उसकी आंखों में चमक आई पर अगले ही पल उसने घर पर पैर से मारा और बच्ची का घरौंदा बिखर गया। “काशी” फूट-फूट कर रोने लगी। उसकी अथक मेहनत पर पानी जो फिर गया था। तभी बच्ची की मां आई और उसे बहलाती हुई अपने साथ ले गई। मेरे पास मंत्रीजी की बातें सुनने के अलावा कोई चारा नहीँ बचा था। लेकिन, मुझे उनकी बोझिल बातें अब दिलचस्प लगने लगी। कई बार हम मुद्दों पर एकतरफा विचार बना लेते हैं, आखिर बच्ची घरौंदा बनाने की कोशिश कर रही थी, वक्त तो लगा। धीरे-धीरे, सोच-समझकर कदम बढ़ाया, प्रयास किया...। जमीनी स्तर पर कुछ तो मोदीजी के काशी में भी बदलाव आया है। इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
देश को प्रधानमंत्री देने वाले काशी को पीएम ने भी विकास के लिए लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं की सौगात दी। विभिन्न योजनाओं का खाका तैयार हुआ, जिनमें कई को अमली जामा पहनाया गया, तो कुछ को लागू करने की माथापच्ची हो रही है। काशी के कायापलट की मशक्कत अभी बाकी है, लेकिन कुछ बदलावों को साफ देखा- महसूस किया जा सकता है-
घाटों-गलियों की बदली तस्वीर
काशी के घाटों-गलियों से गंदगी लगभग नदारद हो गई है। भोर की पौ फटने से पहले ही सफाई कर्मी घाट, रास्तों को बुहार कर कूड़ा ठेले पर लादकर हटा देते हैं। इसी तरह गली-मोहल्लों, चट्टी-चौमुहानियो पर भी सतर्क निगहबानों की देख-रेख में काशी आहिस्ता-आहिस्ता बदल रहा है। अब कोई पान की पीक सड़क, घाट पर पिच्च करके आसानी से बच कर नहीँ निकल सकता है। परिणामतः घाटों पर लोगों का जमघट फिर लगने लगा है और स्नान-ध्यान, पूजन-अर्चन के अलावा गंगा घाटों पर होने कार्यक्रमों में इजाफा हो रहा है। आंकड़े की नजर से बीते चार सालों में करीब 20 फीसद तक सैलानी भी बढ़े हैं। हालांकि, गंगा सफाई और घटते जलस्तर को लेकर कई दुश्वारियों का समाधान अभी बाकी है।
भूमिगत तारों से मुक्ति
शहर के बड़े हिस्से के बिजली के तारों को भूमिगत करने के लिए आईपीडीएस योजना चलाई जा रही है, जिसका काम लगभग पूरा हो गया है। इससे बिजली चोरी कम होने के साथ शहर की तस्वीर बदल रही है, लेकिन योजनाओं में स्थानीय स्तर पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है वह योजना के फायदे से अधिक नुकसान को दिखाने लग रहा है। मानक के विपरीत ही तार को अंडरग्राउंड कर दिया गया है, जो जलभराव के समय बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
कुंड एवं पार्क का सौंदर्यीकरण
काशी के कुण्ड एवं पार्क के सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। दुर्गा मंदिर स्थित कुंड के सौंदर्यीकरण योजना का लोकार्पाण स्वयं पीएम ने किया था। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते काम कई जगह अटके पड़े हैं।
बुनकर अभी जस के तस
काशी में 250 करोड़ रुपये से अधिक ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर बनाया गया है। ऐसा सेंटर आस-पास के जिलों में नहीं है। इसके बाद भी उसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। मन जा रहा था कि पूर्वांचल के बनुकरों से लेकर हस्तकला के लिए यह सेंटर मील का पत्थर साबित होगा, फिलहाल इसका खास परिणाम नहीं दिख रहा है।
कुल मिलाकर, केंद्र में सरकार बनने के बाद से अब तक काशी के लिए तकरीबन 315 बड़ी परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, इनमें अब तक लगभग 279 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। निर्माणाधीन योजनाओं के पूरा होने के बाद यातायात से लेकर तमाम अन्य दिक्कतें भी खत्म होने का अनुमान है।
पूरे हुए विकास कार्य
253 करोड़ : ट्रेड फेसिलिटेशन सेंटर बड़ा लालपुर।
15 करोड़ : मालवीय एथीक्स सेंटर बीएचयू।
13.60 करोड़ : 153 सामुदायिक शौचालयों की निर्माण।
4.09 करोड़ : 68 स्थलों का हेरिटेज विकास।
15.52 करोड़ : हृदय योजना से 29 हेरिटेज सड़कें बनाईं।
4.50 करोड़ : दुर्गाकुंड, लक्ष्मी कुंड समेत तीन तालाबों का जीर्णोद्धार।
131.16 करोड़ : जलापूर्ति योजना प्रथम फेज।
2 करोड़ : डी सेंट्रलाइज्ड वेस्ट टू इनर्जी पहड़िया प्लांट।
-36821 एलईडी स्ट्रीट लाइट।
-3810 हेरिटेज पोल।
कुछ योजनाएं अभी निर्माणाधीन है, जिस पर काम चल रहा है। यानी काशी जस की तस नहीं है। प्रधानमंत्री का चुनाव करने वाले शहर की तस्वीर और तकदीर में बदलाव तो आया है। अब काशीवासी चाहे तो चार साल की नन्हीं बच्ची “काशी” के सपनों का घरौंदा पैरों से मारकर तोड़ दे या चाहे तो इंतजार करें पूरा बनकर तैयार होने का। या चाहे तो मूकदर्शक बनने की जगह कुछ तिनके-पतवार जुटाकर अपना भी थोड़ा योगदान दें, काशी की तरक्की में, उसकी तस्वीर बदलने में।
- सोनी सिंह


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