घुमक्कड़ साथी - Kashi Patrika

घुमक्कड़ साथी

किसी अचंभित कर देने वाली भौगोलिक घटना का गवाह बनाना बड़ा ही अजीब होता हैं जैसा हजारों वर्ष पहले महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा के लोगों के साथ हो चूका हैं। ये लोग रोज घने जंगलों के बीच उल्कापिंड से बने एक क्रेटर के रोज दर्शन करते हैं, नाम हैं लोनार लेक...


लोनार लेक 

लोनार लेक, महाराष्ट्र 


आज आप का ये घुमक्कड़ साथी आप को लोनार लेक के सैर पर लेकर चलेगा जो महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा जिले में स्थित हैं। कहते हैं हजारों वर्ष पहले यहाँ पर एक उल्का पिंड गिरा जो तीन हिस्सों में बट गया और जिसने तीन अलग अलग झीलों का निर्माण किया। बने तीनों झीलों में से दो तो सूख गए पर हजारों वर्षों बाद भी लोनार लेक जस की तस बची रह गई। लोनार लेक के इतिहास के विषय में हमें आईने अकबरी से भी पता चलता हैं। ये सलाइन सोडा लेक एक नैशनल जिओ-हेरिटेज मोन्यूमेंट हैं।

लोनार लेक 

लोनार सरोवर में कई सालों तक कई वैज्ञानिक अनुसंधान भी हुए हैं। इस भौगोलिक धरोहर का व्याख्यान ऐतिहासिक लेखों, जैसे आइन-ए-अकबरी, स्कन्द पुराण आदि में भी किया गया है। दिलचस्प  तो यह हैं कि इस सरोवर का गठन उल्कापिंड या आकाशीय पिंड द्वारा हुआ है। दूसरा यह कि इसका पानी अम्लीय और क्षारीय दोनो ही हैं। सरोवर के पानी में आपको नमक के टुकड़े भी नज़र आएँगे। साधारण भाषा में इसका पानी सोडे की तरह है। अगर आप इसके पानी को बोतल में भरकर हिलाएँगे तो आप इसमें अम्ल की वजह से उत्पन्न होने वाले बुलबुलों को भी देख पाएँगे। यह आपको जितना सुनने में दिलचस्प लग रहा है, उतना ही देखने में भी है।

लोनार लेक 
यह सरोवर चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है और दो नदियों पूर्णा और पेंगंगा के प्रवाह से भरा हुआ है। बारिश के अलावा इन दो नदियों से ही इस सरोवर में पानी आता है। यहाँ की यात्रा कर आप यहाँ के सुरम्य दृश्य को देख आश्चर्यचकित रह जाएँगे।

लोनार लेक 
लोनार सरोवर खुद ही एक पौराणिक धरोहर है और कई सालों से यहाँ का मुख्य केंद्र भी है। इसके साथ ही एक छोटा लोनार या अंबर सरोवर भी है जो इसके पास ही स्थित है। जब उल्का पिंड गिर कर इस क्रेटर सरोवर का गठन कर रहा था तब एक अन्य उल्का पिंड ने इससे थोड़ी ही दूर पर गिरकर इस छोटे लोनार सरोवर का गठन किया। बुलधाना का लोनार क्षेत्र पुराने ज़माने में एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र हुआ करता था। यह अशोका से लेकर चालुक्यों के साम्राज्य, मुगल काल से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा रहा है। इस सरोवर के किनारे ही स्थापित कई मंदिर इसके इतिहास को बखूबी दर्शाते हैं। गोमुख मंदिर, कमलजा मंदिर और दैत्य सूडान मंदिर इस सरोवर के किनारे स्थापित प्रमुख मंदिर हैं। हालाँकि यहाँ कई अन्य मंदिर भी हैं पर उनमें से ज़्यादातर खंडहर के रूप में ही बचे हैं।

लोनार लेक के निकट के पुरावशेष 


लोनार के निकट स्थिन सितारे नुमा मंदिर 


लोनार के निकट स्थित एक पैविलियन 

गोमुख कुंड, लोनार 
यहाँ पहुंचने के लिए आपको औरंगाबाद आना होगा जो यहाँ से करीब १५७ किमी की दूरी पर स्थित हैं। वहां से आप सड़क मार्ग से और कुछ ट्रेकिंग कर यहाँ पहुंच सकते हैं। 

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