पर्यावरण के विलेन - Kashi Patrika

पर्यावरण के विलेन


विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून विशेष: 

मौसम का लगातार बदलता मिजाज हमारा ध्यान पर्यावरण के बिगड़ते हालात की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। ये अलग बात है कि मौसम के इशारे को समझने की बजाय हम मूक दर्शक बने रहना चाहते हैं। समझने की कोशिश करते हैं कि धरती को गर्म, बहुत गर्म करने यानी ग्लोबल वॉर्मिंग की ओर ढकेलने के पीछे किसका हाथ है? क्या कोई एक है जिसकी वजह से धरती का औसत तापमान बढ़ता जा रहा है या फिर ऐसे बहुत सारे फैक्टर हैं, जिनकी बदौलत आज ये हालात पैदा हुए...

धरती के औसत तापमान में 19वीं शताब्दी के आखिरी वर्षों से बढ़ोतरी हुई है। धरती और समुद्र का तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस ऊपर चढ़ा है, यानी पृथ्वी दिनो-दिन और गरम होती जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि औद्योगिक क्रांति के बाद जरूरत से ज्यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हुई है।
ग्रीनहाउस गैस हवा में मौजूद Co2, मिथेन और वाष्प हैं, जो सूरज से निकलने वाली किरणों को मानो अपने अंदर समेट लेती हैं और ग्रह के लिए एक तरह के थर्मल के कंबल का काम करती हैं। ग्रीनहाउस इफेक्ट के बगैर पृथ्वी का तापमान औसतन -18 डिग्री सेल्सियस होता और यह पूरी तरह से बर्फ से ढकी होता। इसमें कोई शक नहीं कि ग्रीनहाउस इफेक्ट पृथ्वी के लिए अच्छा है, लेकिन ग्रीनहाउस गैस का जरूरत से ज्यादा उत्सर्जन तापमान को बढ़ाता जा रहा है-


ईधन और बिजली से झटका
बिजली के लिए कोयले और तेल जैसे ईंधन को जलाना जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। दुनिया में होने वाली एक तिहाई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ऐसा करने की वजह से होता है। आंकड़ों पर गौड़ करें तो, लगभग 30 प्रतिशत जिम्मेदारी उस बिजली की है, जिसके बगैर जिंदगी थम सी जाती है। कोयले और तेल के अलावा लकड़ी जैसे ईंधन को जलाने से भी उत्सर्जन होता है। इसके अलावा रिहायशी और कमर्शियल इमारतों को बनाने के लिए लगने वाला ईंधन भी 8 प्रतिशत तक ग्लोबल वॉर्मिंग करता है।

‛परिवहन’ प्रदूषण की दूसरी बड़ी वजह
साइकिल को छोड़कर स्कूटर, बाइक, कार, हवाई जहाज़ यह सब मिल-जुलकर ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए 15 प्रतिशत जिम्मेदार हैं। यह वर्ल्ड रिसॉर्स इंस्टीट्यूट की 2012 की रिपोर्ट कहती है। परिवहन जलवायु परिवर्तन की दूसरी सबसे बड़ी वजह है।

औद्योगिक निर्माण कार्य का 13 प्रतिशत योगदान
लगातार बन रही इमारतें और धुआं छोड़ती फैक्ट्रियां ग्लोबल वॉर्मिंग की तीसरी सबसे बड़ी वजह है। वैसे परिवहन और निर्माण कार्य के प्रतिशत में कुछ खास फर्क नहीं है और 13 % के साथ यह तीसरे पायदान पर है। डब्लूआरआई के रिपोर्ट में सीमेंट और एल्युमिनियम निर्माण में खपने वाली ऊर्जा को जलवायु परिवर्तन के लिए 6 फीसदी तक जिम्मेदार बताया गया है।

खेती का भी हाथ
अजीब लगता है, लेकिन यह सच है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए 11% खेती को जिम्मेदार माना जाता है। दरअसल इसकी वजह है बीफ जिसके लिए जंगल काटकर खेत तैयार किए जाते हैं, जिस पर मवेशियों को पाला-पोसा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि बीफ उत्पादन के मकसद से पाले गए मवेशियों के लिए 28 गुना ज्यादा जमीन, 11 गुना ज्यादा पानी खर्च होता है।

अवशेष और कूड़ा
कचरे के ढेर से भरी जमीन से मिथेन गैस का उत्सर्जन होता है, जो कि एक अहम ग्रीनहाउस गैस है। बताया जाता है कि ऐसी जमीन 3 प्रतिशत तक ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार है, लेकिन भारत में जिस तरह कूड़े के ढेर लगते हैं, उससे लगता है कि यहां इसकी दर ज्यादा हो सकती है।





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