...जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता/मीना कुमारी - Kashi Patrika

...जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता/मीना कुमारी

आगाज तो होता है अंजाम नहीं होता,
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता।

जब जुल्फ की कालक में घुल जाए कोई राही,
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता।

हँस हँस के जवाँ दिल के हम क्यूँ न चुनें टुकड़े,
हर शख्स की किस्मत में इनआ'म नहीं होता।

दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से,
पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता।

दिन डूबे है या डूबी बारात लिए कश्ती,
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता।। 

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